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सोमवार, 03 अप्रैल, 2006 को 20:20 GMT तक के समाचार

मुसावी को हो सकती है मौत की सज़ा

अमरीका में एक ज्यूरी ने अपने फ़ैसले में कहा है कि अल क़ायदा के कथित सदस्य ज़कारियास मुसावी को सितंबर 2001 में हुए हमलों के सिलसिले में मौत की सज़ा दी जा सकती है.

अधिकारियों का कहना है कि 17 घंटों की लंबी चर्चा के बाद ज्यूरी इस नतीजे पर पहुँची है.

अमरीका के वर्जीनिया प्रांत के एलेक्ज़ेड्रिया शहर में सुनाए गए इस फ़ैसले का मतलब यह है कि अब अदालत इस मामले में आगे सुनवाई करेगी और यह फ़ैसला करेगी कि मुसावी को मौत की सज़ा दी जाए या आजीवन कारावास की.

अमरीका में ग्यारह सितंबर के हमलों के मामले में केवल ज़कारियास मुसावी पर ही मुकदमा चलाया गया है.

इन हमलों में लगभग तीन हज़ार लोग मारे गए थे.

सरकारी वकीलों का कहना है कि मुसावी ने 11 सितंबर के हमलों की जानकारी छिपा ली वरना हमलों को रोका जा सकता था.

बचाव पक्ष का तर्क था कि वे दिमागी तौर पर ठीक नहीं हैं और वे नहीं समझ सकते कि वे क्या कर रहे हैं और सितंबर के हमलों में उनका कोई हाथ नहीं था.

सर्वसम्मत फ़ैसला

अदालत के अधिकारी एडवर्ड एडम ने वर्जीनिया की अदालत में ज्यूरी का फ़ैसला पढ़कर सुनाया.

उन्होंने कहा कि ज्यूरी ने सर्वसम्मति से माना कि 'सीमापार से आतंकवादी घटनाओं का षडयंत्र रचने' के इस मामले में सरकार की ओर से चार तथ्य तो स्थापित कर दिए गए हैं.

एक तो यह कि जब मुसावी ने अपराध किया तब उनकी उम्र 18 वर्ष से अधिक थी और दूसरा ये कि 16-17 अगस्त 2001 को उन्होंने अधिकारियों से झूठ बोला.

तीसरा तथ्य यह कि मुसावी ने एक ऐसे कार्य में हिस्सा लिया जिसमें किसी की जान ली जा सकती थी और चौथा यह कि प्रत्यक्ष तौर पर मुसावी ने जो कुछ किया उससे कम से कम एक व्यक्ति की जान तो गई ही.

इन चारों तथ्यों पर ज्यूरी के सदस्य एकमत थे.

एडम ने कहा कि इसके अलावा यह भी बिना शक साबित किया जा सका कि एक विमान को नष्ट करने का षडयंत्र रचा गया और महाविनाश के हथियार के उपयोग करने का भी षडयंत्र रचा गया.

उन्होंने कहा कि ज्यूरी ने इसके आधार पर फ़ैसला किया कि मुसावी को मौत की सज़ा तो दी जा सकती है.

इस ज्यूरी में तीन महिलाएँ थीं और नौ पुरुष और उन्होंने पिछले बुधवार को देर रात तक दोनों पक्षों को सुना और बहस की.

प्रशिक्षण

ज़कारियास मुसावी मोरोक्को में पैदा हुए फ़्रांसीसी नागरिक हैं.

उन्होंने ग्यारह सितंबर के हमलों का षड्यंत्र रचने के मामले में छह आरोप स्वीकार किए हैं.

मुसावी को अगस्त 2001 में गिरफ़्तार किया गया था और 9/11 के हमले के समय मुसावी अमरीका की जेल में बंद थे. उन्हें 'आतंकवादी' होने के संदेह में गिरफ़्तार कर लिया गया था.

उन दिनों वे विमान उड़ाना सीख रहे थे और उनके प्रशिक्षक को उन पर शक हो गया था जिन्होंने उनकी शिकायत कर दी थी.

सरकारी वकीलों का कहना है कि मुसावी ग्यारह सितंबर की साज़िश का हिस्सा थे और उन्होंने जाँचकर्ताओं से झूठ बोला था, अगर वे सच बताते तो वर्ल्ड ट्रेड सेंटर और पेंटागॉन पर हुए हमलों को रोका जा सकता था.