शनिवार, 01 अप्रैल, 2006 को 15:47 GMT तक के समाचार
इंटरनेट सुरक्षा से जुड़ी एक कंपनी ने आगाह किया है कि साइबर अपराधी लोगों को धोखा देने के लिए बीबीसी के नाम का उपयोग कर रहे हैं.
इंटरनेट सिक्यूरिटी कंपनी वेबसेंस का कहना है कि जालसाज़ माइक्रोसॉफ़्ट के इंटरनेट एक्सप्लोर ब्राउजर की सुरक्षा ख़ामियों का फ़ायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं.
उल्लेखनीय है कि हाल ही में इंटरनेट एक्सप्लोरर में तीन सुरक्षा ख़ामियों का पता चला है.
ईमेल के ज़रिए की जा रही धोखाधड़ी में बीबीसी न्यूज़ वेबसाइट के किसी समाचार का अंश लोगों को भेजा जाता है.
समाचार अंश के नीचे में 'रीड मोर' या 'पूरा समाचार पढ़ने के लिए क्लिक करें' के संदेश के साथ 'एक्टिव लिंक' दिया जाता है.
लिंक पर क्लिक करते ही आप पहुँच जाते हैं जालसाज़ों द्वारा प्रयुक्त वेबसाइट पर जो कि कंप्यूटर पर एक सॉफ़्टवेयर डाउनलोड कर देगा.
'की-लॉगर'
इस तरह डाउनलोड हुए 'की-लॉगर' सॉफ़्टवेयर के ज़रिए एक जालसाज़ आपकी इंटरनेट गतिविधियों, ख़ास कर वित्तीय सेवाओं वाली वेबसाइटों से जुड़ी गतिविधियों पर नज़र रख सकता है.
वेबसेंस के तकनीकी मामलों के निदेशक मार्क मुर्टाग के अनुसार साइबर अपराधियों द्वारा बीबीसी जैसे जाने-माने ग्लोबल ब्रांड का इस्तेमाल किया जाना कोई नई बात नहीं है.
उन्होंने कहा कि पिछले साल अमरीका में आए कैटरीना तूफ़ान के बाद इंटरनेट पर सक्रिय जालसाज़ों ने रेड क्रॉस के नाम का उपयोग किया था.
बीबीसी न्यूज़ वेबसाइट के संपादक स्टीव हेरमन ने जालसाज़ों द्वारा बीबीसी के नाम के उपयोग पर चिंता व्यक्त की है.