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शनिवार, 01 अप्रैल, 2006 को 03:24 GMT तक के समाचार

रोज़गार क़ानून पर शिराक का आश्वासन

फ्रांस के राष्ट्रपति ज़्याक शिराक ने कहा है कि वह नए रोज़गार क़ानून को लागू करने की मंशा रखते हैं हालाँकि उन्होंने इस क़ानून में कुछ फेरबदल करने का भी इशारा दिया.

ग़ौरतलब है कि इस क़ानून के विरोध में फ्रांस में देशव्यापी प्रदर्शन हुए हैं.

संविधान की निगरानी करने वाली एक समिति भी इस क़ानून को हरी झंडी दिखा चुकी है.

टेलीविज़न पर शुक्रवार को देश को संबोधित करते हुए शिराक ने कहा कि वह युवाओं की रोज़गार चिंताओं को भली-भाँति समझते हैं क्योंकि भविष्य की तरफ़ देखते हुए उन्हें अनिश्चितताएँ और असुरक्षा नज़र आ रही है.

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र का सम्मान करते हुए वह इस क़ानून को लागू करने के लिए इस पर दस्तख़त करेंगे लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि वह इस क़ानून के लागू होते ही इसमें कुछ परिवर्तन भी करने का इरादा रखते हैं.

उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि इस क़ानून बिल्कुल तत्काल प्रभाव से लागू नहीं किया जाएगा और उन प्रावधानों में संशोधन भी किया जाएगा जिसको लेकर देश भर में विरोध प्रदर्शन हुए हैं.

राष्ट्रपति शिराक ने कहा कि इस क़ानून को प्रयोग के तौर पर लागू करने की अवधि दो साल से घटाकर एक साल की जाएगी और रोज़गार देने वालों के लिए यह अनिवार्य बनाया जाएगा कि वह अपने किसी कर्मचारी को बर्ख़ास्त करने को लिखित रूप से न्यायासंगत ठहराएंगे.

शिराक ने कहा कि वह मज़दूर संगठनों और अन्य सामाजिक संगठनों से अपील करेंगे कि वे अपने सुझाव पेश करें और विश्वविद्यालयों से भी अनुरोध करेंगे कि वे छात्रों की भविष्य को लेकर जो चिंताएँ हैं, उन्हें दूर करने के लिए एकजुट होकर काम करें.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि राष्ट्रपति शिराक के इन आश्वासनों से यह साफ़ नज़र आता है कि वह मज़दूर संगठनों को बातचीत की मेज़ पर आने के लिए माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं और प्रधानमंत्री डोमिनिक डी विलेपाँ को इस्तीफ़ा देने के लिए मजबूर भी नहीं होना पड़े.

हालाँकि मज़दूर संगठनों ने इस पर संतोष नहीं व्यक्त किया है और उन्होंने शिराक के इन आश्वासनों को भ्रामक बताते हुए घोषणा की है कि वे आगामी मंगलवार को भी एक दिन की हड़ताल करेंगे.