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गुरुवार, 30 मार्च, 2006 को 15:36 GMT तक के समाचार

महाशक्तियों की चेतावनी मगर ईरान अड़ा

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पाँच स्थाई सदस्यों और जर्मनी ने एक स्वर में ईरान से 30 दिनों के भीतर अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत के लिए राज़ी होने को कहा है.

इन देशों ने ऐसा नहीं करने पर ईरान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने की चेतावनी दी है.

मगर इस बीच ईरान के विदेश मंत्री मनुचेहर मौत्तक़ि ने परमाणु तकनीक विकसित करने को अपना अधिकार बताया है.

दुनिया के छह प्रमुख देशों की जर्मनी की राजधानी बर्लिन में हुई बैठक इसलिए महत्त्वपूर्ण मानी जा रही थी क्योंकि इसमें ये तय होना था कि अगर एक महीने में ईरान ने यूरेनियम संवर्द्धन का काम नहीं रोका तो उसके विरुद्ध क्या कार्रवाई की जाए.

बर्लिन से बीबीसी संवाददाता रे फ़र्लॉन्ग का कहना है कि इन छह देशों यानि संयुक्त राष्ट्र के पाँच स्थाई सदस्यों अमरीका, ब्रिटेन, फ़्राँस, रूस और चीन के अलावा जर्मनी ने ये स्पष्ट नहीं किया कि अगर ईरान का यही रुख़ बरक़रार रहा तब उनका अगला क़दम क्या होगा.

इस बैठक के बाद इन छह देशों की कोशिश थी ये दर्शाने की कि ईरान के मसले पर इनमें कोई मतभेद नहीं हैं.

बढ़ा दबाव

जिनीवा से बीबीसी संवाददाता इमोजेन फ़ूक्स कहती हैं कि संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद ने बुधवार को ये बयान जारी किया था, जो ईरान को यूरेनियम संवर्द्धन रोकने के लिए बाध्य तो नहीं कर सकता लेकिन इस बयान और बर्लिन की बैठक के बाद आए बयान से ईरान पर दबाव काफ़ी बढ़ गया है.

अमरीका का कहना है कि यूरेनियम संवर्द्धन करके यानि यूरेनियम से परमाणु ईंधन बनाने का काम कर ईरान परमाणु हथियार बनाना चाहता है, जबकि ईरान इसका लगातार खंडन करता रहा है.

बर्लिन की बैठक में क्या हुआ ये कहना तो मुश्किल है लेकिन बैठक से पहले आए बयान कुछ संकेत ज़रूर देते हैं और उनसे लगता है कि अमरीका ने ईरान पर दबाव बनाने की प्रक्रिया जारी रखी है.

ब्रिटेन और फ़्राँस आम तौर पर इस रुख़ का समर्थन करते हैं लेकिन चीन चाहता है कि अब भी बातचीत के ज़रिए ये विवाद सुलझाया जाए.

ईरान के लिए चिंता

बीबीसी संवाददाता स्टीवन ईक कहते हैं कि ईरान के लिए ये चिंता की बात हो सकती है कि रूस का रुख़ कुछ कड़ा हो रहा है लेकिन इसके बावजूद जानकारों का कहना है कि फ़िलहाल चीन और रूस ईरान के ख़िलाफ़ सैनिक कार्रवाई का समर्थन नहीं करते.

वैसे बैठक के ठीक पहले तक ईरान के विद्रोही तेवर बरक़रार थे और जब बैठक जारी थी तभी ईरान ने बयान दे दिया कि वो दबाव में नहीं आएगा और यूरेनियम संवर्धन का काम जारी रखेगा.

ईरान के विदेश मंत्री मनुचेहर मौत्तक़ि ने कहा, "जो लोग परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर चुके हैं और मानव इतिहास की सबसे भयानक त्रासदियों में से एक के लिए ज़िम्मेदार हैं वो अब निरस्त्रीकरण की बात कर रहे हैं. ईरान शांतिपूर्ण इस्तेमाल के लिए परमाणु तकनीक विकसित करना चाहता है और ऐसा करना हमारा अधिकार है.”

यानि कुल मिलाकर अब भी ये स्पष्ट नहीं है कि ईरान अगर एक महीने में सुरक्षा परिषद की बात नहीं मानता है तो क्या होगा लेकिन बर्लिन में जारी बयान के बाद उस पर दबाव ज़रूर बढ़ा है.

बैठक के बाद जर्मनी के विदेश मंत्री फ़्रैंक वॉल्टर स्टाइनमायर ने कहा कि ईरान को अब ये तय करना है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ सहयोग करना चाहता है या फिर अलग थलग रहना चाहता है.

जर्मनी पहले ही कह चुका है कि अगर ईरान अंतरराष्ट्रीय समुदाय की बात नहीं मानता है तो उसे विशेष तौर पर आर्थिक क्षेत्र में कई दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है.