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बुधवार, 29 मार्च, 2006 को 11:25 GMT तक के समाचार

क्या कह रहे हैं इसराइल के अख़बार?

चुनाव परिणाम पर इसराइली अख़बारों में विस्तृत कवरेज दिखाई देना स्वाभाविक है. ज़्यादातर अख़बार इस बात पर सहमत हैं कि प्रधानमंत्री यहुद ओल्मर्ट को जनादेश मिला है कि वे इसराइल की सीमाएँ तय करें.

ज़्यादातर अख़बारों का मानना है कि इस चुनाव पर कदीमा पार्टी का गठन करने वाले अरियल शेरॉन की गहरी छाया पड़ी और लिकुद पार्टी के नेता बिन्यामिन नेतन्याहू उनका जवाब नहीं ढूँढ सके.

हारेत्ज़

"इसराइल में ऐसी सरकार बनने जा रही है जो यहुद ओल्मर्ट की इसराइली सीमा को पुनर्रपरिभाषित करने की योजना पर अमल करेगी. यही नहीं इस चुनाव में कदीमा पार्टी की जीत ने पिछली गड़बड़ियों के लिए ज़िम्मेदार बिन्यामिन नेतनयाहू को बिल्कुल अप्रासंगिक बना दिया है."

एदियोत अहरनोत

"चुनाव में समझदार, सजग और संतुलित दिमाग़ वाले लोगों की जीत हुई है. जो लोग ये कहते रहे थे कि अरियल शेरॉन को ग़ज़ा पट्टी छोड़ने का कोई अधिकार नहीं था वे अब पश्चिमी तट भी छोड़ेंगे. इसराइली जनता ने शेरॉन और ओल्मर्ट के तरीक़े को ही स्वीकार किया है."

येरूशलम पोस्ट

"अरियल शेरॉन कहते रहे कि पिछले चुनाव में लिकुद पार्टी को 19 से बढ़ाकर 38 तक ले जाना उनकी मुख्य सफलता थी और इस सफलता के पीछे उनका व्यावहारिक रवैया था लेकिन उनके विरोधी बिन्यामिन नेतन्याहू इसे मानने को कभी तैयार नहीं हुए. अब ये परिणाम दिखा रहे हैं कि अस्पताल में बिस्तर पर पड़े शेरॉन सही थे न कि नेतन्याहू. इस चुनाव में इसराइली जनता ने सिर्फ़ नेतन्याहू को नहीं बल्कि उनकी विचारधारा को नकार दिया है."

हेत्ज़ोफ़

"अब कोई वामपंथ या दक्षिणपंथ नहीं है, इस चुनाव में सभी विचारधाराएँ मिट गई थीं. दक्षिणपंथ की तबाही सात वर्ष पहले लगे झटके से भी अधिक ज़ोरदार है. कोई पेंशनरों की पार्टी की विचारधारा जानता है, वे दक्षिणपंथी हैं, वामपंथी हैं, या पूंजीवादी हैं?"