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बुधवार, 29 मार्च, 2006 को 06:39 GMT तक के समाचार

कदीमा पार्टी को सबसे अधिक सीटें

इसराइल में चार महीने पहले अरियल शेरॉन ने जिस कदीमा पार्टी का गठन किया था उसने संसदीय चुनाव में सबसे अधिक सीटें जीती हैं.

कदीमा पार्टी को 120 सीटों वाली इसराइली संसद क्नेसेट में 28 सीटें मिली हैं और वह लेबर पार्टी के साथ मिलकर सरकार बना सकती है.

इसराइल के कार्यवाहक प्रधानमंत्री एहुद ओल्मर्ट ने कहा है कि अब समय आ गया है कि देश के लिए इतिहास के एक नए अध्याय को रचा जाए.

जनवरी में अरियल शेरॉन के अचानक अस्वस्थ हो जाने के बाद पार्टी का नेतृत्व संभालने वाले ओल्मर्ट ने कहा कि वे फ़लस्तीनियों के साथ शांति के लिए ज़मीन छोड़ने के लिए तैयार हैं.

ओल्मर्ट ने मध्यमार्गी कदीमा पार्टी के सदस्यों को संबोधित करते हुए वर्ष 2010 तक इसराइल के लिए एक स्थायी सीमा बना लेने के चुनावी वादे को पूरा करने की योजना का ज़िक्र किया.

उन्होंने कहा कि वे फ़लस्तीनियों के साथ शांति वार्ता के लिए तैयार हैं लेकिन इस बारे में अगर कुछ करना पड़ा तो वे अपनी तरफ़ से ही पहल करेंगे.

चुनाव परिणाम

इसराइल में मंगलवार को हुए संसदीय चुनाव में 62.3 प्रतिशत मतदाताओं ने वोट डाले जो इसराइल के इतिहास में सबसे कम मतदान है.

99 प्रतिशत मतों की गिनती पूरी होने तक कदीमा पार्टी को 28 सीटें या 21.8 प्रतिशत मत मिले हैं.

दूसरे नंबर पर है मध्य-वामपंथी लेबर पार्टी जिसे 20 सीटें या 15.1 प्रतिशत मत मिले हैं.

अरियल शेरॉन की पुरानी दक्षिणपंथी लिकुद पार्टी को सबसे बड़ा झटका लगा है जिसे केवल 11 सीटें मिल पाई हैं और वह पाँचवें नंबर पर चली गई है. पूर्व प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू लिकुद पार्टी के नेता हैं.

इसराइल के चुनाव में वैसे तो लगभग 30 पार्टियाँ मैदान में थीं मगर असल टक्कर कदीमा, लेबर और लिकुद पार्टी के बीच थी.

1948 में इसराइल के गठन के बाद से वहाँ या तो लिकुद पार्टी का शासन रहा है या लेबर पार्टी का.

प्रतिक्रियाएँ

कदीमा पार्टी के नेता और कार्यकारी प्रधानमंत्री एहुद ओल्मर्ट ने कहा है कि वह फ़लस्तीनियों के साथ शांति स्थापित करने के लिए विवादित ज़मीनें छोड़ने के लिए तैयार हैं.

उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि इसराइल की अंतिम सीमाएँ तय हो जाएँ और इसके लिए दोनों पक्षों को कुछ 'खोने-पाने' के लिए तैयार रहना पड़ेगा.

उधर लेबर पार्टी के सदस्य इत्ज़ाक हरज़ोग ने हार स्वीकार करते हुए अपनी बात कुछ दिलचस्प अंदाज़ में कही, "कदीमा पार्टी का प्रदर्शन सूनामी लहरों के बहाव की तरह था जिसमें कई अन्य पार्टियाँ बह गईं लेकिन इसके बावजूद हमारी पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन किया है".

वहीं दक्षिणपंथी लिकुद पार्टी के नेता मुवेन रूवलेन ने कहा, "हम बड़े मुद्दों पर ध्यान देते रहे लेकिन ग़रीब लोगों की ज़रूरतों पर ध्यान नहीं दे सके और शायद इसी का दंड हमें इन चुनावों में मिला है."

इसराइल के प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन नवंबर 2005 में सत्ताधारी लिकुड पार्टी से अलग हो गए थे और उन्होंने अपनी अलग कदिमा पार्टी बनाई थी.

उसके बाद उन्होंने संसद भंग करने की सिफ़ारिश की थी. इसराइली संसद का कार्यकाल चार साल का होता है.

जनवरी 2006 में अरियल शेरॉन के दिमाग़ की नस फट गई थी जिसके बाद से वह अचेतावस्था में हैं और कई ऑपरेशनों के बाद भी होश में नहीं आ सके हैं.