शुक्रवार, 24 मार्च, 2006 को 08:42 GMT तक के समाचार
जापान में एक न्यायालय ने एक नए परमाणु रिएक्टर को बंद करने के आदेश दिए हैं क्योंकि भूकंप आने की स्थिति में इसकी सुरक्षा की गारंटी नहीं दी जा सकती.
जापान की राजधानी टोकियो से पश्चिमोत्तर में इशिकावा स्थित शिका रिएक्टर के आसपास रहने वाले लोगों ने अदालत में याचिका दायर करके कहा था कि अगर भूकंप आता है तो उस स्थिति में यह रिएक्टर ख़तरनाक साबित हो सकता है.
याचिका में कहा गया था कि इस रिएक्टर से भूकंप आने की स्थिति में ख़तरनाक विकिरण हो सकता है.
इस रिएक्टर को चलाने वाली कंपनी ने कहा है कि वह न्यायालय के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील करेगी.
जापान ऊर्जा ज़रूरतों के लिए इस रिएक्टर पर बहुत हद तक निर्भर है लेकिन हाल के वर्षों में अनेक घटनाएं होने की वजह से भरोसा कुछ हिला भी है.
अस्थिर
इस रिएक्टर का विरोध करने वाले गुट में 135 सदस्य हैं जिन्होंने मई 2005 में याचिका दायर करके इस रिएक्टर को बंद करने की माँग की थी. यह जापान का दूसरा सबसे बड़ा परमाणु रिएक्टर है.
स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस रिएक्टर का निर्माण पुराने हो चुके सरकारी सुरक्षा दिशा निर्देशों के अनुरूप किया गया था.
उन्होंने दावा किया कि अगर कोई दुर्घटना होती है तो लोगों को भारी ख़तरा हो सकता है क्योंकि सरकारी वैज्ञानिकों ने आशंका व्यक्त की है कि 7.6 की तीव्रता वाला भूकंप कभी भी आ सकता है.
टोकियो में बीबीसी संवाददाता जोनाथन हैड का कहना है कि यह जापान में सर्वाधिक आधुनिक परमाणु रिएक्टर है और न्यायालय के ताज़ा फ़ैसले से 54 अन्य रिएक्टरों के वजूद पर भी सवाल खड़ा हो जाता है जो फिलहाल काम कर रहे हैं.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि जापान ऐसे कुछ गिने-चुने देशों में से एक है जहाँ भूकंप बड़ी संख्या में आते रहते हैं इसलिए किसी ऐसे क्षेत्र में परमाणु रिएक्टर बनाना बहुत मुश्किल काम है जहाँ भूकंप आने का ख़तरा ना हो.
इस रिएक्टर को चलाने वाली बिजली कंपनी ने कहा है कि वह भूकंप आने से पैदा होने वाले ख़तरों की स्थिति के लिए सभी सुरक्षा इंतज़ाम किए गए हैं.
जापान की ऊर्जा ज़रूरतों का लगभग एक तिहाई हिस्सा इसी रिएक्टर से पूरा होता है.