बुधवार, 22 मार्च, 2006 को 05:11 GMT तक के समाचार
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली ख़मेनेई ने इराक़ के बारे में अमरीका के साथ ईरान की बातचीत के प्रस्ताव का समर्थन किया है.
लेकिन ख़मेनेई ने साथ ही अमरीका को चेतावनी दी है कि वह धौंस जमाने की कोशिश न करे.
ख़मेनेई ने पहली बार खुलकर ईरान-अमरीका बातचीत का खुले तौर पर समर्थन किया है.
उन्होंने ये भी चेतावनी दी है कि ईरान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के किसी भी ऐसे आदेश को नहीं मानेगा जो उसके हितों के विरूद्ध हो.
उल्लेखनीय है कि संयुक्त राष्ट्र की संस्था अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम के विवाद को सुरक्षा परिषद के पास भेज दिया है जिसे ये तय करना है कि ईरान के विरूद्ध क्या कार्रवाई की जाए.
ईरान के किसी भी सरकारी मामले मे आयतोल्ला ख़मेनेई का वचन अंतिम वचन माना जाता है.
ईरान-अमरीका वार्ता पर उनका ये बयान ऐसे समय में आया है जब वहाँ के रूढ़िवादी इस वार्ता की ये कहकर आलोचना कर रहे हैं कि इससे ईरानी विदेश नीति में एक बड़ा बदलाव आ जाएगा.
चेतावनी
अयातुल्ला ख़मेनेई ने ईरान के मशहद शहर मे कहा कि इराक़ की स्थिति पर ईरान को अमरीका के साथ बातचीत करने में कोई परेशानी नहीं है.
लेकिन साथ ही उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा,"बातचीत में अगर धूर्त अमरीकियों की धौंस जमाने वाली प्रवृत्ति जारी रही तो फिर इराक़ के बारे में अमरीका से कोई बात नहीं होगी".
उन्होंने कहा कि अमरीका के साथ बातचीत ईरान के सामने अमरीकी अधिकारियों से ये कहने का मौक़ा होगा कि वे इराक़ से निकल जाएँ और इराक़ियों को अपनी सरकार चलाने दें.
बातचीत के प्रस्ताव को अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने भी ये कहते हुए समर्थन दिया है कि इससे ईरान को ये बताने का मौक़ा मिलेगा कि इराक़ के भीतर उनकी गतिविधियाँ कितनी सही हैं और कितनी ग़लत.
अभी ये तय नहीं है कि ईरान और अमरीका की वार्ता कब होगी लेकिन दोनों देशों ने कहा है कि बातचीत में परमाणु मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं होगी.