बुधवार, 22 मार्च, 2006 को 20:42 GMT तक के समाचार
कुछ शोधकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने इस बात का पता लगा लिया है कि मनुष्यों में बर्ड फ़्लू का संक्रमण होना मुश्किल क्यों है लेकिन जब संक्रमण हो जाता है तो ये इतना घातक क्यों होता है.
बर्ड फ़्लू के चलते दुनिया में लाखों पक्षी मारे जा चुके हैं जबकि सिर्फ़ केवल 184 लोगों में ही बर्ड फ़्लू पाया गया.
इनमें से आधे से ज़्यादा की मौत हो चुकी है.
नेचर और सांइस पत्रिकाओं में दो स्वतंत्र दलों ने लिखा है कि उन्होंने इस बारे में पता लगा लिया है कि बर्ड फ़्लू और आम तौर पर होने वाला फ़्लू मनुष्य के फेफडों में कैसे संक्रमण करता है.
घातक क्यों
शोधकर्ताओं का कहना है कि आम फ़्लू के मुकाबले बर्ड फ़्लू को फेफड़ों में बहुत गहरे तक संक्रमण करना पड़ता है.
यही वजह है कि मानव कोशिकाओं में बर्ड फ़्लू के संक्रमण के आसार कम होते हैं.
लेकिन अगर कोई व्यक्ति संक्रमित हो जाता है तो बर्ड फ़्लू का वायरस बहुत तेज़ी से फैलता है और नुकसान पुहँचाता है.
वैज्ञानिकों का ये भी कहना है कि वे इस बात को लेकर चिंतित है कि बर्ड फ़्लू का वायरस आसानी से उत्परिवर्तित हो सकता है. इसके बाद ये वायरस और भी घातक हो जाएगा.
मंगलवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा था कि वर्ष 2003 के बाद से बर्ड फ़्लू के कारण दुनिया भर में 103 लोगों की मौत हो चुकी है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बताया है कि बर्ड फ़्लू के एच5एन1 वायरस से मौत के सबसे ताज़ा मामले अज़रबैजान में सामने आए हैं.
संगठन के तथ्यों के अनुसार वियतनाम में बर्ड फ़्लू से 42, इंडोनेशिया में 22 और थाईलैंड में 14 लोगों की मौत हो चुकी है.