गुरुवार, 16 मार्च, 2006 को 13:27 GMT तक के समाचार
अमरीकी राष्ट्रपति कार्यालय व्हाइट हाउस ने पुष्टि की है कि अमरीका ऐसे देशों या संगठनों पर हमला करने से नहीं हिचकेगा जो या तो अमरीका के लिए दुश्मनी रखते हैं या जिनके पास परमाणु या रसायनिक हथियार हैं.
मार्च 2003 में इराक़ पर हमला करने के बाद से पहली बार अमरीका की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति को परिभाषित किया गया है जिसमें ईरान को अमरीका के लिए एक मात्र और सबसे बड़ा ख़तरा बताया गया है.
नई रणनीति में पहले से ही हमले करने की नीति का समर्थन किया गया है. यह नीति सबसे पहले 2002 में बनाई गई थी और इराक़ पर हमले के बाद से इन नीति की आलोचना भी हुई है.
लेकिन इस नीति में यह भी कहा गया है कि अमरीका का मक़सद कूटनीति के ज़रिए लोकतंत्र के प्रसार पर ज़ोर देना है.
नई रणनीति में अन्य ऐसे मुद्दों पर भी प्रकाश डाला गया है जिन्हें लेकर अमरीका चिंतित है, जैसेकि - एड्स का फैलाव, फ्लू बीमारी का ख़तरा और प्राकृतिक और पर्यावरण संबंधी संकट वग़ैरा.
अमरीका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्टीफ़न हैडली नई रणनीति एक भाषण के साथ गुरूवार को जारी करेंगे.
'सात बेक़ाबू देश'
इस दस्तावेज़ के हवाले से मिली ख़बरों में कहा गया है कि नई रणनीति का मुख्य ज़ोर उन चुनौतियों का सामना करने पर है जो इराक़ युद्ध के बाद अमरीका के सामने आई हैं.
अब से पहले की रणनीति दस्तावेज़ों में कुछ देशों को अलग-अलग रूप में दुश्मन के रूप में परिभाषित किया गया था लेकिन इस रणनीति में "सात निरंकुश देशों" को गिनाया गया है, वे हैं- ईरान, उत्तर कोरिया, सीरिया, क्यूबा, ज़िम्बाब्वे, बर्मा और बेलारूस.
49 पन्नों वाले इस दस्तावेज़ के शुरुआती शब्द कहते हैं, "अमरीकी नीति हर देश और संस्कृति में लोकतांत्रिक आंदोलनों और संगठनों को समर्थन देने वाली है जिसका अंतिम लक्ष्य हमारी दुनिया में निरंकुश शासन को समाप्त करना है."
इस दस्तावेज़ को राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने देख लिया है और उसे मंज़ूर भी कर दिया है.