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बुधवार, 15 मार्च, 2006 को 06:57 GMT तक के समाचार

इसराइल ने फ़लस्तीनी चरमपंथी पकड़ा

इसराइली सैनिकों ने पश्चिमी तट के शहर जेरिको की एक जेल पर धावा बोलकर एक प्रमुख फ़लस्तीनी चरमपंथी को पकड़ लिया है.

इसराइली सेना ने मंगलवार सुबह को इस फ़लस्तीनी जेल पर धावा बोल दिया था.

हमले के बाद लगभग 12 फ़लस्तीनियों ने इसराइली सेना के सामने समर्पण कर दिया जिनमें अहमद सादात भी शामिल हैं.

इसराइल का मानना है कि 2001 में इसराइली मंत्री रेहावाम ज़ीवी की हत्या के पीछे पॉपुलर फ़्रंट फ़ॉर द लिबरेशन ऑफ़ पैलेस्टाइन के नेता अहमद सादात का हाथ है.

हालाँकि इसराइली सेना के हमले के बाद नाराज़ फ़लस्तीनियों ने प्रदर्शन किए हैं और बदला लेने के लिए अगवा किए जाने की भी घटनाएँ हुई हैं.

इसराइली सेना ने ब्रिटेन और अमरीका के पर्यवेक्षकों के इस फ़लस्तीनी जेल से हटने के बाद ये हमला किया जिन्होंने सुरक्षा प्रबंधों के बारे में शिकायत की थी.

फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास ने पर्यवेक्षकों को हटाने के लिए ब्रिटेन और अमरीका की निंदा की है और कहा है कि क़ैदियों की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी उनकी ही थी.

हमला

इसराइल के विदेश मंत्रालय का कहना है कि जेरिको स्थित जेल पर हमला ज़रूरी था क्योंकि फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास ने ये कह दिया था कि अहमद सादात और अन्य चरमपंथियों को रिहा किया जाना है.

इसराइली सैनिकों ने ब्रिटेन और अमरीका के पर्यवेक्षकों के निकलते ही गोलाबारी शुरू कर दी और जेल की दीवारों को बुलडोज़र से ढहाए जाने के बाद उसपर कब्ज़ा कर लिया.

इस दौरान अहमद सादात और इसराइल द्वारा ढूँढे जा रहे अन्य फ़लस्तीनी जेल के भीतर ही रहे.

सादात ने बीबीसी को फ़ोन पर बताया कि दो बंदी मारे गए हैं और कुछ लोग घायल हुए हैं.

जेल पर हमले के बाद फ़लस्तीनियों ने कई विदेशी इमारतों पर जवाबी हमला बोल दिया. इनमें गज़ा स्थित यूरोपीय संघ का परिसर और ब्रिटिश काउंसिल की इमारत भी शामिल है.

रामल्ला में भी ब्रितानी सांस्कृतिक केंद्र पर हमला किया गया. गज़ा से प्राप्त रिपोर्टों में बताया गया है कि बंदूकधारियों ने वहाँ कई विदेशी लोगों को अगवा कर लिया है.

अब्बास ने निंदा की

महत्वपूर्ण है कि इसराइली फ़ौज ने धावा तब बोला जब जेल में रखे गए प्रमुख लोगों की निगरानी करने वाले ब्रितानी और अमरीकी अधिकारियों को हटा लिया गया था.

फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास ने इसराइली फ़ौज की कार्रवाई की निंदा की है और इस घटना के लिए अमरीका और ब्रिटेन को ज़िम्मेदार ठहराया है.

उनका कहना है कि अमरीकी और ब्रितानी अधिकारियों को हटाना फ़लस्तीनियों के साथ किए गए समझौते का उल्लंघन है.

उधर ब्रितानी विदेश मंत्री जैक स्ट्रॉ ने कहा है कि बंदियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बार-बार किए गए अनुरोध को नज़रअंदाज़ किया गया.