रविवार, 12 मार्च, 2006 को 00:26 GMT तक के समाचार
बोस्निया के शहर स्रेब्रेनीत्सा में यूरोप के सबसे बड़े नरसंहार में मारे गए क़रीब 600 लोगों का सोमवार, 31 मार्च 2003 को सामूहिक अंतिम संस्कार किया गया था.
दाह संस्कार के मौक़े पर मृतकों के रिश्तेदारों और मित्रों सहित क़रीब 10 हज़ार लोग मौजूद थे.
बोस्निया युद्ध के आख़िरी दौर में 1995 में सर्ब सेनाओं ने स्रेब्रेनीत्सा शहर में क़रीब आठ हज़ार मुस्लिम पुरुषों और बच्चों को मार डाला था.
अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए मृतकों के संबंधियों को देश के कोने-कोने से सेब्रेनीत्सा के पोटोकारी इलाक़े में लाया गया.
क़रीब 100 से ज़्यादा कोच इस सेवा में लगाए गए थे.
नाटो की निगरानी
इस मौक़े पर सैकड़ों पुलिसवाले 10 यूरोपीय संघ पुलिसवालों की निगरानी में तैनात थे और उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के दो हेलिकॉप्टर भी निगरानी में लगे थे.
बोस्निया के अधिकारियों ने सोमवार को एक दिन के शोक की घोषणा की है.
सेब्रेनीत्सा में नगरपालिका की इमारतों पर झंडा आधा झुकाया गया है.
हालांकि अभी भी बोस्निया की सर्ब सरकार इस पर सवाल उठाती है कि क्या वाकई यह एक नरसंहार था.
पहले 60 क़ब्रों से मारे गए लोगों के अवशेष निकाले गए और फिर उनकी पहचान की गई.
सोमवार को 600 लोगों को दफ़नाया गया.
लकड़ी के ताबूतों को हरे रंग के कपड़े से ढंका गया था.
क़ब्रिस्तान सेब्रेनीत्सा के बाहरी छोर पर पूर्व संयुक्त राष्ट्र परिसर के अंदर बनाया गया है और इसका आकार एक फूल की पंखुड़ियों की तरह है.
अपने भाई की मौत का ग़म मना रही साबाहेता गराजेविच ने कहा कि उन्हें कम से कम इस बात का तो संतोष है कि अब उन्हें यह पता है कि उनका भाई कहाँ दफ़नाया गया है.
लेकिन गराजेविच को अभी भी अपने पति और बेटे के अवशेषों की तलाश है.
1995 के इस नरसंहार में अपने पिता और तीन भाइयों को खो चुके एक और व्यक्ति ने बताया कि हत्यारों ने लोगों को तो मार डाला लेकिन उनकी यादों को नहीं ख़त्म कर पाए.
दोषी
संयुक्त राष्ट्र युद्ध अपराध पंचाट ने बोस्निया के सर्ब नेता रादोवान करादज़िक और उनके सैनिक कमांडर रातको म्लादिच को स्रेबेनीत्सा के नरसंहार के लिए दोषी ठहराया है.
जनरल म्लादिच के उप कमांडर रादिस्लाव क्रस्तिच पहले व्यक्ति थे जिन्हे बोस्निया नरसंहार के लिए दोषी ठहराया गया.
म्लादिच ने स्रेब्रेनीत्सा में हुए नरसंहार की योजना बनाई थी.
इस शहर में युद्ध के बाद की मुस्लिम आबादी में से सिर्फ़ 27 हज़ार लोग ही यहां रह रहे हैं.
इस शहर के आसपास अब भी सामूहिक क़ब्रें मिल रही हैं.
डीएनए तकनीक में हुई प्रगति के कारण अवशेषों की पहचान में आसानी तो हो रही है लेकिन हज़ारों लोगों के अवशेष की पहचान नहीं हो पाई है.