शुक्रवार, 10 मार्च, 2006 को 02:58 GMT तक के समाचार
सात देशों के 260 से ज़्यादा डॉक्टरों ने अमरीका से अनुरोध किया है कि वह ग्वांतनामो बे बंदी शिविर में भूख हड़ताली क़ैदियों को खिलाने-पिलाने के लिए ज़बरदस्ती करना बंद करे.
चिकित्सा पत्रिका द लेंसेट में लिखे एक पत्र में इन डॉक्टरों ने आहवान किया है कि जो भी डॉक्टर ग्वांतनामो बे शिविर के बंदियों को बलपूर्वक खाना खिलाने या पानी वग़ैरा पिलाने से जुड़ा हुआ है उसे अपनी व्यावसायिक संस्थाओं के नियमों से अनुशासित होना चाहिए.
बीबीसी के सुरक्षा मामलों के संवाददाता गोर्डन कोरेरा का कहना है कि डॉक्टरों का यह पत्र द लेंसेट पत्रिका के आगामी संस्करण में प्रकाशित हुआ है.
पत्र में लिखा गया है कि विश्व चिकित्सा एसोसिएशन के दिशा-निर्देशों में डॉक्टरों को भूख हड़ताल पर बैठे हुए क़ैदियों को बलपूर्वक खाना-पानी देने से मना किया गया है.
पत्र के अनुसार यह डॉक्टरों की ज़िम्मेदारी है कि वे इलाज कराने से इनकार करने के क़ैदियों के अधिकार को मान्यता दें.
इन डॉक्टरों ने पत्र में आहवान किया है कि जो डॉक्टर इन दिशा निर्देशों का उल्लंघन करते हैं, अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन जैसी संस्थाओं को उनसे जवाब माँगना चाहिए.
पत्र में कहा गया है कि ये डॉक्टर अपने बचाव में यह नहीं कह सकते कि वे तो सिर्फ़ आदेशों का पालन कर रहे थे.
अमरीकी सेना के अनुसार ग्वांतनामो बे शिविर में पाँच क़ैदी भूख हड़ताल पर हैं और ऐसा माना जाता है कि उनमें से एक ब्रिटेन का पूर्व निवासी है.
इन पाँच क़ैदियों में से तीन को बलपूर्वक खाना-पानी दिया गया है और इन बलपूर्वक तरीकों में आराम देने वाली कुर्सी का इस्तेमाल भी शामिल है.
अमरीकी रक्षा मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया कि अमरीका की यह नीति रही है कि वह समुचित चिकित्सा उपायों के ज़रिए मानवीय तरीके से जीवन की रक्षा करने की कोशिश करे और ऐसा मौजूदा क़ानूनों और प्रक्रियाओं के दायरे में होना चाहिए.