सोमवार, 06 मार्च, 2006 को 01:58 GMT तक के समाचार
संयुक्त राष्ट्र में अमरीका के प्रतिनिधि जॉन बोल्टन ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताओं को नहीं समझता, तो उसे गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है.
उन्होंने सोमवार को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) की एक महत्वपूर्ण बैठक से पहले ऐसा कहा है.
आईएईए की बैठक में ईरान के ख़िलाफ़ संभावित प्रतिबंधों के लिए उसके परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा सुरक्षा परिषद में भेजा जा सकता है.
उधर ईरान के मुख्य वार्ताकार अली लारीजानी ने दोहराया है कि ईरान शांतिपूर्ण परमाणु शोध पर अपना अधिकार त्यागने को तैयार नहीं है.
आईएईए की रिपोर्ट
पर्यवेक्षकों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख मोहम्मद अल बारादेई औपचारिक रूप से इस मामले में अपनी रिपोर्ट आईएईए बैठक में पेश करेंगे.
इसमें उनकी ओर से ये कहे जाने की संभावना है कि वो ये बात निश्चित तौर पर नहीं कह सकते कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की दिशा में काम नहीं कर रहा है.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर माँग ये है कि ईरान अपना यूरेनियम संवर्धन का काम न करे, जबकि ईरान का कहना है कि परमाणु कार्यक्रम उसका संप्रभु अधिकार है जिसे वह नहीं छोड़ेगा.
उधर संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी प्रतिनिधि जॉन बोल्टन का कहना है, "ईरान के शासन को ये समझाना होगा कि अगर उसने अंतरराष्ट्रीय सोच से अलग-थलग रहने के रास्ते पर चलना जारी रखा तो उसे इसके गंभीर और दर्दनाक नतीजे झेलने पड़ सकते हैं."
बोल्टन का कहना था कि ईरान के ख़तरे का सामना करने के लिए जितना लंबा हम इंतज़ार करेंगे, ये मसला सुलझाना उतना ही मुश्किल होता जाएगा.
'राष्ट्रवाद का मसला'
उधर तेहरान से बीबीसी संवाददाता सादेक़ सबा कहती हैं कि ईरानियों ने इस मसले को अब एक राष्ट्रवाद से जुड़ा मसला बना दिया है और वहाँ से पीछे हटना उनके लिए मुश्किल हो सकता है.
ईरान को इस बात का पता है कि अगर ईरान पर प्रतिबंध लगे तो इससे देश को काफ़ी नुक़सान होगा मगर फिर भी कड़े बयान आना जारी हैं.
ईरान के मुख्य परमाणु वार्ताकार अली लारिजानी ने कल फिर ईरान का पक्ष दोहराया और कहा, "अगर ईरान का मसला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भेजा गया तो ईरान यूरेनियम संवर्धन का काम फिर शुरू करेगा, इसलिए हमारी सलाह है कि ये रास्ता न चुना जाए."