शनिवार, 04 मार्च, 2006 को 00:04 GMT तक के समाचार
कनाडा में सुप्रीम कोर्ट ने वहाँ के स्कूलों में पढ़ने वालों सिख विद्यार्थियों को छोटी कृपाण अपने साथ रखने की अनुमति देने के पक्ष में फ़ैसला सुनाया है.
कोर्ट ने कहा है कि सार्वजनिक स्थलों पर कम लंबाई की कृपाण पहननी होगी. सिखों के लिए कृपाण का धार्मिक महत्व है.
कनाडा में मॉन्ट्रियल स्कूल बोर्ड ने 2001 में एक सिख छात्र गुरबज सिंह मुल्तानी को कृपाण अपने साथ रखने से मना कर दिया था.
गुरबज सिंह ने कोर्ट के फ़ैसले का स्वागत किया है. जब ये मामला उठा था उस समय वे 12 साल के थे.
गुरबज सिंह ने कहा, “हर कोई अपने हक़ों के लिए लड़ा, मुझे मेरा हक़ मिला और मैं खुश हूँ.”
वर्ष 2001 में स्कल में पढ़ने वाले एक छात्र के अभिभावक ने छात्रों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी. इसके बाद स्कूल अधिकारियों ने स्कूल में कृपाण लाने से मना कर दिया था.
लेकिन कनाडा की सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल के फ़ैसले को 8-0 के बहुमत से पलट दिया है.
फ़ैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि कृपाण पहनने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाना देश के चार्टर ऑफ़ राइट्स का उल्लंघन होगा.
चार्टर में कनाडा के भीतर पूरी धार्मिक आज़ादी की बात कही गई है.
सुरक्षा पर बहस
न्यायाधीश लूइज़ चैरॉन ने फ़ैसले में लिखा है, "कनाडा के समाज में धार्मिक सहिष्णुता का बहुत महत्व है. अगर कुछ छात्रों को लगता है कि गुरबज सिंह का स्कूल में कृपाण पहनना ठीक नहीं है तो ये स्कूलों का दायित्व है कि वो छात्रों को धार्मिक सहिष्णुता का मूल्य सिखाएँ."
जो अभिभावक स्कूलों में कृपाण न पहनने के पक्ष में थे उन्होंने कोर्ट के फ़ैसले पर नाखुशी ज़ाहिर की है.
एक अभिभावक कलॉडी बूचर्ड ने कहा, “अभिभावक होने के नाते बच्चों की सुरक्षा धार्मिक आज़ादी से ज़्यादा ज़रूरी है, मुझे तो यही लगता है”
लेकिन कोर्ट के फ़ैसले में सार्वजनिक स्थलों में कृपाण पहनने पर कुछ पाबंदियाँ लगाई गई हैं. इसमें कृपाण की लंबाई छोटी रखने, उन्हें मयान में रखने और कपड़ों के नीचे पहनने की बात शामिल है.
कनाडा में करीब दो लाख पचास हज़ार सिख समुदाय के लोग रहते हैं.