बुधवार, 01 मार्च, 2006 को 18:38 GMT तक के समाचार
पूर्व इराक़ी राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन ने बग़दाद में मुक़दमे के दौरान कहा कि उनके शासन के दौरान हुई किसी भी घटना के लिए सिर्फ उन्हीं से जवाब मांगा जाए.
सुनवाई के दूसरे दिन सद्दाम ने अदालत से कहा कि अदालत उनके अलावा किसी और पर मुक़दमे न चलाए. ज़ाहिर है उनका इशारा सात सहअभियुक्तों की ओर था.
पहले सद्दाम ने 1982 में दुजाली में उन लोगों के खेतों को नष्ट करने की बात मानी जो कि कथित रूप से उन पर जानलेवा हमले के दोषी थे.
मुक़दमा 12 मार्च तक स्थगित कर दिया गया है.
बीबीसी के जिम मुइर अदालत में मौजूद थे. उनके अनुसार सद्दाम ने धैर्य से सब सबूतों और बयानों को सुना जिसमें बाकी अभियुक्तों पर 148 शिया मुसलमानो को मारने का इल्ज़ाम लगाया गया था.
'मेरी ज़िम्मेवारी'
सद्दाम सुनवाई के आखिर में जमकर बोले. उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि उनके अलावा किसी और पर इल्ज़ाम नहीं लगना चाहिए.
उन्होंने कहा, "अगर राष्ट्रपति पर हमला करने वाले लोगों को सज़ा देना जुर्म हैं तो मुझ पर मुकदमा चलाया जाए और बाकियों का समय न नष्ट किया जाए."
उन्होंने कहा, "मैं सद्दाम हुसैन हूँ. उस वक्त मैं गद्दी पर था. अब समय बदल गया हैं लेकिन मैं नहीं. मैं ये नहीं कहूँगा कि कोई और ज़िम्मेदार था."
पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने दुजाली के उन सब किसानों के बाग़ और खलिहानों को साफ करने का आदेश दिया था.
मुख्य अभियोजक जाफर अल-मुसावी ने अदालत में दुजाली जनसंहार से जुड़े सद्दाम के आदेशों से जुड़े काग़ज़ात पेश किये.
अदालत ने सौ गाँववालों की मौत से जुड़े काग़ज़ात भी देखे जिन्हें सूली पर लटका दिया गया था.
इनमें कुछ ऐसे सबूत भी शामिल थे जिनमें इराकी खुफिया एजेंसियों ने बताया कि सौ में से पचास लोगों की फाँसी के तख्त पर नहीं बल्कि पूछताछ के दौरान मौत हो गई थी.
अदालत ने मुक़दमे को 11 दिन के लिए स्थगित कर दिया, जिस दौरान ये देखा जाएगा कि पूर्व गृह मंत्री सादून शाकिर पर मुक़दमा चलना चाहिए कि नहीं.