सोमवार, 27 फ़रवरी, 2006 को 03:46 GMT तक के समाचार
इराक़ में पिछले सप्ताह एक शिया मज़ार पर हमले के बाद से हिंसा का दौर जारी है और रविवार को अलग-अलग घटनाओं में लगभग 30 लोग मारे गए.
पिछले बुधवार को समारा में अल अस्करी मज़ार पर हुए हमले के बाद भड़की हिंसा में लगभग 200 लोग मारे जा चुके हैं.
रविवार को अधिकतर लोगों की जान शिया और सुन्नी समुदाय के लोगों के बीच झड़पों में हुई.
सबसे बड़ी घटना हुई दक्षिणी बग़दाद में जहाँ कई मोर्टार हमलों में 15 इराक़ी मारे गए हैं.
उधर इराक़ में एक सप्ताह में दूसरी बार एक शिया मज़ार को हमले का निशाना बनाया गया. इस बार बसरा में अल अमीर मज़ार पर एक बम फटा लेकिन उससे अधिक नुक़सान नहीं हुआ.
इस बीच कट्टर शिया मौलवी मुक़्तदा अल सद्र इराक़ के आस-पास के इलाक़ों को दौरा छोड़कर वापस लौट आए हैं और उन्होंने मज़ार पर हमले और इसके बाद भड़की हिंसा की निंदा की है.
शांति की अपील
शिया और सुन्नियों के बीच हिंसा को रोकने के मकसद से शिया नेता मुक़्तदा अल सदर ने अपने समर्थकों से हिंसा बंद करने की अपील की है और कहा है कि दोनो पक्ष एक-साथ प्रार्थनाएँ करें.
उन्होंने बसरा में एक सभा में अपने समर्थकों से कहा,"हम शिया समुदाय के सम्मानित अल हावज़ा गुट के समर्थक हैं, हम जो सही है उसके समर्थक हैं. मस्जिदों को जलाकर और मुसलमानों को मारकर हम भलाई का साथ दे रहे हैं या बुराई का?"
राजधानी बग़दाद में रविवार को तीसरे दिन भी सार्वजनिक यातायात पर पाबंदी रखी गई.
पूरे दिन का कर्फ़्यू तो हटा लिया गया है और आम लोगों की चहल-पहल सड़कों पर देखी जा रही लेकिन वाहनों की आवाजाही अब भी बंद है.
शनिवार को इराक़ के मुख्य धारा के राजनीतिक दलों ने शिया और सुन्नी समुदायों के बीच भड़की हिंसा की निंदा की थी जो बुधवार को समारा में इमामों के परिसर में विस्फोट के बाद भड़की थी.
प्रधानमंत्री इब्राहीम अल जाफ़री ने कहा है कि सभी दलों ने यह माना है कि राष्ट्रीय एकता बनाए रखने की बेहद ज़रूरत है.