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शनिवार, 25 फ़रवरी, 2006 को 22:47 GMT तक के समाचार

शिया-सुन्नियों का एकता का आह्वान

इराक़ में शिया-सुन्नी समुदाय के धार्मिक नेताओं ने धार्मिक स्थलों की रक्षा के लिए एकजुट रहने का फ़ैसला किया है.

स्थिति पर विचार करने के लिए शनिवार को इराक़ के एक प्रमुख शिया गुट और सुन्नियों के सबसे बड़े गुट के प्रतिनिधियों के बीच बैठक हुई.

इराक़ के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने भी मुलाक़ात कर हालात पर चर्चा की.

इराक़ के समारा शहर में पिछले बुधवार को शिया समुदाय की पवित्र अल अस्करी मज़ार पर हमला हुआ था जिसके बाद से वहाँ जातीय हिंसा भड़क उठी है.

हालात संभालने के लिए कई क्षेत्रों में कर्फ़्यू लगाया गया है लेकिन इसके बावजूद हिंसा का दौर जारी है. शनिवार को अलग-अलग घटनाओं में कम से कम 36 लोग मारे गए.

बुधवार के बाद से शुरू हुई हिंसा में अभी तक कम-से-कम 165 लोग मारे जा चुके हैं.

इराक़ सरकार ने रविवार को पूरे बग़दाद और उसके आस-पास वाहनों की आवाजाही पर पाबंदी लगा दी है.

एकजुटता

शनिवार को शिया नेता मुक़्तदा अल सद्र के गुट और सुन्नी गुट एसोसिएशन ऑफ़ मुस्लिम स्कॉलर्स के प्रतिनिधियों की एक बैठक हुई जिसके बाद एक संयुक्त बयान जारी किया गया.

इस बयान में धार्मिक स्थलों को तोड़े जाने की निंदा की गई और कहा गया कि दोनों समुदाय के लोग मिल-जुलकर इस स्थलों की रक्षा करेंगे.

मुक्तदा सद्र के प्रतिनिधि सलाह अल उबैदी ने कहा,"हमारी बैठक सफल रही जिसके बाद हमने एक साझा बयान में कहा है कि हम मिल जुलकर काम करेंगे, नकारात्मक बातों से बचेंगे और क़ानून तोड़नेवालों को न्याय के कटघरे में खड़ा करेंगे."

उधर तनाव ख़त्म करने के लिए एक और प्रयास के तहत इराक़ी टेलीविज़न पर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को विभिन्न पक्षों के नेताओं से मिलते हुए दिखाया गया.

इराक़ में पिछले वर्ष दिसंबर में चुनाव हुए थे. लेकिन किसी को बहुमत नहीं मिला जिसके बाद से शिया, सुन्नी और कुर्द नेताओं के बीच सरकार गठन के बारे में बातचीत चल रही है.

हिंसा

शनिवार को इराक़ में शिया समुदाय के एक और पवित्र स्थल कर्बला में एक कार बम धमाका हुआ जिसमें कम-से-कम पाँच लोग मारे गए.

उधर दक्षिणी बग़दाद में संघर्ष के बाद 14 इराक़ी कमांडो के शव मिले हैं.

वहीं तीन पुलिसकर्मी तब मारे गए जब इराक़ की एक जानी-मानी पत्रकार के जनाज़े पर हमला किया गया.

अल अरेबिया टीवी की पत्रकार अतवर बहजात और उनके दो सहकर्मी पिछले बुधवार को तब मारे गए थे जब वे लोग अल अस्करी मज़ार पर हमले की रिपोर्टिंग कर रहे थे.

इन घटनाओं के अलावा बक़ूबा में एक ही परिवार के 12 लोगों की गोली मार कर हत्या कर दी गई.