गुरुवार, 23 फ़रवरी, 2006 को 01:54 GMT तक के समाचार
दक्षिणी इराक़ी शहर बसरा में कुछ बंदूकधारियों ने एक जेल से 12 क़ैदियों को निकाला और फिर इनमें से 11 लोगों को मार डाला.
पुलिस का कहना है कि मारे गए लोगों में कुछ विदेशी भी हैं लेकिन सभी के बारे में आशंका है कि वे सुन्नी चरमपंथी थे.
इसे शिया समुदाय के सबसे पावन स्थलों में से एक अल अस्करी मज़ार पर हुए बम हमले के बदले की कार्रवाई के रुप में देखा जा रहा है.
उल्लेखनीय है कि बुधवार को हुए इस धमाके में मज़ार को बहुत नुक़सान हुआ है. उसका प्रमुख गुंबद पूरी तरह ध्वस्त हो गया.
इसके बाद से पूरे इराक़ में विरोध प्रदर्शन हो रहा है और तनाव का माहौल है.
इस माहौल को देखते हुए इराक़ के राष्ट्रपति जलाल तालाबानी ने देश को गृहयुद्ध से बचाने के लिए समाज के सभी वर्गों से मिलकर काम करने की अपील की है.
राष्ट्रपति तालाबानी ने आरोप लगाया कि हथियारबंद लोगों के एक गिरोह ने इराक़ में राष्ट्रीय सहमति की सरकार के गठन को रोकने के उद्देश्य से मज़ार पर हमला किया.
इस बीच इराक़ के कई हिस्सों में सुन्नी मुसलमानों पर हमले हुए हैं. इन हमलों में तीन मौलवियों समेत आठ लोगों की मौत हो गई है.
इराक़ में शियाओं के शीर्ष आध्यात्मिक नेता अयातुल्ला अली अल-सिस्तानी ने भी लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है.
अधिकारी बनकर हमला
पुलिस के अनुसार बसरा की मीना जेल में कुछ बंदूकधारी घुस गए उन्होंने सुरक्षाकर्मियों के हथियार छीन लिए और 12 संदिग्ध सुन्नी चरमपंथियों को अगवा कर ले गए.
बसरा में ब्रितानी सेना के एक प्रवक्ता ने कहा है कि हमलावरों ने ख़ुद को इराक़ी गृहमंत्रालय का अधिकारी बताकर जेल में प्रवेश किया.
वे कुल 11 लोगों को अपने साथ ले गए थे. बाद में उनकी लाशें शहर में मिलीं. पुलिस का कहना है कि उनको गोली मारने से पहले प्रताड़ित भी किया गया था.
मारे गए लोगों में कम से कम दो मिस्र के नागरिक हैं और कुछ सऊदी नागरिक हैं.