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बुधवार, 22 फ़रवरी, 2006 को 02:05 GMT तक के समाचार

'अमरीकी हिरासत में सौ की मौत'

एक मानवाधिकार संस्था ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अगस्त 2002 से अब तक इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी सेना की हिरासत में क़रीब सौ क़ैदियों की मौत हो चुकी है.

अमरीकी संस्था 'ह्यूमन राइट्स फ़र्स्ट' की इस रिपोर्ट के विवरण बीबीसी के एक टेलीविज़न कार्यक्रम में दिखाए गए थे.

इस कार्यक्रम में कहा गया है कि जिन 98 लोगों की मौत हुई है उनमें से 34 के बारे में आशंका है कि उन्होंने आत्महत्या की थी.

अमरीकी रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि उन्होंने ये रिपोर्ट नहीं देखी है लेकिन वे इसे 'बहुत गंभीरता' से ले रहे हैं और इसकी पूरी जाँच की जाएगी और दोषी को सज़ा दी जाएगी.

बुधवार को प्रकाशित ये रिपोर्ट अमरीका रक्षा विभाग और दूसरे अमरीकी अधिकारियों की सूचना के आधार पर तैयार की गई थी.

पिछले हफ़्ते ही एक ऑस्ट्रेलियाई टेलीविज़न चैनल ने इराक़ की अबू ग़रैब जेल में क़ैदियों के साथ दुर्व्यवहार की तस्वीरें प्रसारित की थीं.

प्रताड़ना

'ह्यूमन राइट्स फ़र्स्ट' की प्रतिनिधि डेबरा पर्लस्टेन ने कहा कि वे आश्वस्त हैं कि जो सूचनाएँ उन्हें मिली हैं वे विश्वसनीय है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन 34 लोगों ने आत्महत्याएँ की हैं उनके साथ 'ज़बरदस्ती की गई या लापरवाही भरा बर्ताव' किया गया.

इसके अनुसार कोई 11 मामले संदेहास्पद हैं और आठ से बारह लोगों की मौत प्रताड़ित किए जाने के कारण हुई है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि इन सबके बावजूद कभी कभार ही आरोप तय किए गए हैं और सज़ाए मामूली सी ही दी गई हैं.

बीबीसी के इस कार्यक्रम में इराक़ में अमरीकी राजदूत ज़ल्मे ख़लीलज़ाद ने कहा है कि ज़्यादातर सैनिक क़ानून का पालन करते हैं.

उन्होंने माना है कि दुर्व्यवहार की घटनाएँ होती हैं. उन्होंने कहा, "वे भी इंसान हैं और क़ानून तोड़ते हैं, ग़लतियाँ करते हैं, लेकिन उन्हें जवाबदेह होना पड़ेगा और हमारी व्यवस्था के साथ यह अच्छा है कि हम लोगों की जवाबदेही तय करते हैं."

इस रिपोर्ट पर ब्रिटेन की एमनेस्टी इंटरनेशनल के प्रवक्ता ने हिरासत में मौत की जाँच की माँग की है.

उन्होंने कहा कि एमनेस्टी इंटरनेशनल ने दोषी सैनिकों को दी जा रही हल्की फ़ुल्की सज़ा का मामला भी उठाया है.