बुधवार, 15 फ़रवरी, 2006 को 19:20 GMT तक के समाचार
आतंकवाद विरोधी क़ानून के मामले में ब्रिटेन सरकार को बुधवार को संसद में एक बड़ी जीत हासिल हुई है.
आतंकवाद विरोधी विधेयक के मसौदे में एक उपनियम जोड़े जाने पर संसद के निर्वाचित सदन कॉमन सभा में बहस हुई थी और उसके बाद हुए मतदान में सरकार का प्रस्ताव 277 के मुक़ाबले 315 वोटों से पारित हो गया.
यानी मसौदे में सरकार ये उपनियम जोड़ने में कामयाब हो गई है कि आतंकवाद का महिमामंडन करना भी दंडनीय अपराध होगा.
लेकिन विरोधियों का कहना है कि न तो सरकार आतंकवाद को परिभाषित कर रही है और न ही महिमामंडन को.
यानी विधेयक अगर क़ानून बना तो उसके दुरपयोग की भी आशंकाएँ हैं.
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने बहस के दौरान मज़बूती से अपना पक्ष रखते हुए कहा, “मुझे लगता है कि माननीय सांसदों को ये बात समझनी होगी कि अगर हम आतंकवाद के महिमामंडन को दंडनीय अपराध नहीं बनाएँगे तो हम बाहरी दुनिया में ये संदेश मज़बूती से नहीं भेज पाएँगे कि हम आतंकवाद को बढ़ावा देने वालों को इस देश में क़तई बर्दाश्त नहीं करेंगे.”
दूसरी ओर, विपक्षी कंज़र्वेटिव पार्टी के प्रवक्ता का कहना था कि वर्तमान क़ानूनों में बदलाव की कोई आवश्यकता नहीं है.
परंपराएँ
दरअसल, इस विवाद के मूल में है ब्रिटेन की उदारवादी परंपराएँ और क़ानून की व्याख्या.
अब तक ब्रिटेन में यही माना जाता है कि किसी को सज़ा तभी दी जाती है जब उसने कोई ग़लत काम किया हो और इस नए विधेयक का विरोध इसी आधार पर हो रहा है.
उदाहरण के तौर पर - ब्रिटेन में एक मौलवी रहे हैं अबू हम्ज़ा जिनके बारे में कहा जाता है कि आतंकवादी कार्रवाइयों को अंजाम देने के लिए आए कुछ लोग उनके भाषण सुनने आया करते थे.
मानवाधिकारों से जुड़े मामलों को देखनेवाले वक़ील ज्यौफ़्री बाइंडमैन कहते हैं कि अबू हम्ज़ा को सज़ा मिली, इसी से साबित होता है कि अभी जो क़ानून हैं वे अपने आप में काफ़ी हैं.
ज्यौफ्री बाइंडमैन ने कहा, “अबू हम्ज़ा के मामले में उनको सज़ा इस आधार पर मिली कि उन्होंने हिंसा की धमकियाँ दीं और हिंसा को जानबूझकर बढ़ावा दिया. मामला स्पष्ट था और उन्हें सज़ा मिली.”
लेकिन ब्रिटेन सरकार के गृह मंत्रालय में उप मंत्री हेज़ल ब्लेयर्स का कहना है, “आप ही सोचिए – अगर कोई कह रहा हो कि सात जुलाई को ब्रिटेन में हुए हमले कितने अच्छे थे, ये तो होना ही था और जो हमलावर इसमें मारे गए वो स्वर्ग जाएँगे तो क्या ये सही होगा? मुझे लगता है ऐसा कहने वालों को सज़ा मिलनी चाहिए.”
लेकिन निचले सदन के बाद अब इस विधेयक को ऊपरी सदन में पेश किया जाएगा जहाँ इस तरह का एक विधेयक पहले पारित नहीं हुआ था.