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बुधवार, 15 फ़रवरी, 2006 को 17:07 GMT तक के समाचार

जॉर्डन में नौ को मौत की सज़ा

जॉर्डन की एक सैन्य अदालत ने एक रसायनिक हमले की साज़िश रचने के आरोप में नौ लोगों को मौत की सज़ा सुनाई है, इन लोगों में अल क़ायदा नेता अबू मुसाब अल ज़रक़ावी भी शामिल हैं.

अबू मुसाब अल ज़रक़ावी और तीन अन्य अभियुक्तों की ग़ैरहाज़िरी में ही उन्हें सज़ा सुनाई गई.

अबू मुसाब अल ज़रक़ावी को जॉर्डन में पहले से ही दो अन्य आरोपों में मौत की सज़ा सुनाई जा चुकी है.

इस साज़िश के प्रमुख अभियुक्त आज़मी अल जायूसी अदालत में मौजूद थे. उनके वकीलों का कहना है कि जायूसी से इक़बालिया बयान लेने के लिए उन्हें प्रताड़ित किया गया.

जॉर्डन के अधिकारियों का कहना है कि अप्रैल 2004 में एक रसायनिक हमले को नाकाम कर दिया गया था और अगर यह हमला कामयाब हो जाता तो उसमें हज़ारों लोगों की जान जा सकती थी.

अधिकारियों के अनुसार हमलावरों ने विस्फोटकों और ज़हरीले रसायनों से भरे ट्रकों को देश की ख़ुफ़िया सेवाओं के मुख्यालय से टकराने की साज़िश रची थी.

'ख़तरनाक हमला'

मौत की सज़ा सुनाए जाने के बाद अभियुक्तों ने नारे लगाए कि जज 'ज़ालिम' हैं.

अभियुक्तों ने कहा, "बिन लादेन का संगठन बढ़ रहा है और हम फिर वापस आएँगे."

जब इन लोगों को गिरफ़्तार किया गया था तो अधिकारियों ने कहा था कि अगर उनकी साज़िश कामयाब हो जाती तो उस हमले में हज़ारों लोगों की मौत होती और जैसा कि अम्मान में मौजूद बीबीसी संवाददाता जॉन लाइन का कहना है कि वह जॉर्डन में अब तक का सबसे भीषण हमला होता.

दूसरी तरफ़ बचाव पक्ष के वकीलों ने तर्क दिया कि अभियुक्तों को थोड़ी सी मात्रा में रसायन के साथ पकड़ा गया था और वह सामग्री ख़तरननाक रसायनिक बम के लायक नहीं थी.

वकीलों ने कहा कि आज़मी अल जायूसी का इक़बालिया बयान दिए जाने से पहले उन्हें क़रीब एक पखवाड़े तक प्रताड़ित किया गया.

एक ऑडियो टेप भी अदालत में सुनाया गया जिसे अबू अल ज़रक़ावी का बताया गया और उस टेप में कथित रूप से ज़रक़ावी ने हमले की साज़िश की ज़िम्मेदारी क़बूल की थी लेकिन इस बात से इनकार किया कि हमले में रसायनिक हथियारों का इस्तेमाल किया जाना था.

इस साज़िश के सिलसिले में कुल मिलाकर 13 लोगों पर आरोप लगाए गए जिनमें से दो को तीन साल की क़ैद हुई बाक़ी दो को बरी कर दिया गया था.