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मंगलवार, 14 फ़रवरी, 2006 को 11:42 GMT तक के समाचार

हम तीन दिन से भूख हड़ताल पर हैं: सद्दाम

इराक़ के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन ने मंगलवार को बग़दाद में अदालत को बताया है कि वे और उनके सात अन्य साथी अपने साथ हुए बर्ताव का विरोध करने के लिए भूख हड़ताल पर हैं.

पवित्र क़ुरान हाथ में उठाए हुए सद्दाम हुसैन ने कहा, "हम तीन दिन से भूख हड़ताल पर हैं." अदालत में प्रतिवादियों ने शोर भी मचाया.

वीडियोः सद्दाम ने अदालत में बुश विरोधी नारे लगाए

सद्दाम हुसैन ने सोमवार को हुई सुनवाई की तरह मंगलवार को भी नारेबाज़ी की और 'अरब क़ौम ज़िंदाबाद' के नारे लगाए और न्यायालय को अमरीका की कठपुतली अदालत बताया.

सद्दाम हुसैन के तीख़े तेवर

ग़ौरतलब है कि सद्दाम हुसैन और उनके सात अन्य सहयोगियों पर 1982 में दुजैल गाँव में 148 लोगों की हत्या के सिलसिले में मुक़दमा चल रहा है. अगर उन्हें दोषी पाया जाता है तो फाँसी की सज़ा हो सकती है.

मंगलवार को सद्दाम हुसैन की सरकार में उच्च पदों पर रहे चार अधिकारी सद्दाम हुसैन मामले में गवाही दे रहे हैं लेकिन मुख्य वकील का कहना है कि शायद समय आने पर वे सद्दाम हुसैन के ख़िलाफ़ गवाही न दें.

'बुश मुर्दाबाद'

अपने ख़िलाफ़ चल रहे मुकदमे का कुछ हफ़्ते बहिष्कार करने के बाद, सोमवार को 'बुश मुर्दाबाद' के नारे लगाते हुए सद्दाम न्यायालय में पेश हुए थे.

उन्होंने ज़ोर देकर अदालत में कहा था कि उन्हें अपनी इच्छा के ख़िलाफ़ न्यायालय में पेश होने के लिए मजबूर किया गया है.

इसके बाद जज और प्रतिवादियों के बीच तीख़ी नोकझोंक भी हुई थी और प्रतिवादियों ने अपने वकीलों की अनुपस्थिति पर शिकायत दर्ज की.

प्रतिवादी पक्ष की टीम मुकदमे से इसलिए पीछे हट गई है क्योंकि वह मुकदमे की प्रक्रिया और कार्रवाई की शैली से नाराज़ हैं.

उन्होंने नए मुख्य जज राऊफ़ अब्दुल रहमान पर पक्षपात करने का आरोप लगाया है.

सोमवार को सद्दाम हुसैन ने कहा, "वे मुझे बलपूर्वक यहाँ लाए हैं. आप मेरी ग़ैर-मौजूदगी में मेरे ख़िलाफ़ मुकदमा चलाएँ. क्या आप ऐसा करने में ख़ुद को सक्षम नहीं मानते?"

उन्होंने नारे लगाए, "देशद्रोही मुर्दाबाद, देशद्रोही मुर्दाबाद, बुश मुर्दाबाद. उम्माह (इस्लामी क़ौम) ज़िंदाबाद...इस्लामी क़ौम ज़िंदाबाद..."

उनके क़रीबी रिश्तेदार बर्ज़ान इब्राहीम अल-तिकरीती की अदालत में सुरक्षाकर्मियों के साथ झड़प हुई.

सद्दाम फिर चीख़े, "ये अदालत नहीं है. ये अदालत नहीं है. ये तो खेल हो रहा है."

जज रहमान का कहना था कि वे उन्हीं क़ानून का पालन कर रहे हैं जो सद्दाम हुसैन के शासनकाल में बनाए गए थे.