मंगलवार, 14 फ़रवरी, 2006 को 01:46 GMT तक के समाचार
संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्वांतानामो बे में कुछ क़ैदियों को यातना दी गई जो अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का उल्लंघन है.
संयुक्त राष्ट्र की यह रिपोर्ट लीक हो गई है और इसके मसौदे को अमरीका के अख़बार लॉस एंजेल्स टाइम्स ने प्रकाशित किया है.
इसमें कहा गया है कि जाँचकर्ता यह सिफ़ारिश कर सकते हैं कि ग्वांतानामो बे के बंदी गृह को बंद कर दिया जाए.
उधर अमरीका ने इस रिपोर्ट की निंदा करते हुए कहा है कि इसमें तथ्य नहीं हैं.
अख़बार ने ख़बर प्रकाशित की है और संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट को तैयार करने वाले सदस्य मैनफ़्रेड नोवाक से बात भी की है.
उन्होंने कहा है, "हमने अमरीका की सभी तर्कों को सुना लेकिन हमें लगता है कि कई जगह मानवाधिकार और यातना के अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन हो रहा है."
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट भी कहती है कि ग्वांतानामो बे में कुछ क़ैदियों के साथ जो व्यवहार हो रहा है वह यातना की श्रेणी में आता है.
इस यातना का ज़िक्र करते हुए कहा गया है कि भूख हड़ताल कर रहे क़ैदियों को नाक के रास्ते नली डालकर ज़बरदस्ती खाना दिया गया और कई बार पूछताछ के लिए बहुत अधिक तापमान, ज़बरदस्त शोर और तेज़ रौशनी सहन करनी पड़ी.
संयुक्त राष्ट्र की टीम ने ग्वांतानामो बे के बंदी गृह की वैधानिकता पर भी सवाल उठाए हैं.
यह रिपोर्ट पूर्व क़ैदियों और उनके वकीलों और परिवारजनों से 18 महीनों के दौरान हुई बातचीत पर आधारित है.
अमरीकी प्रतिक्रिया
उधर अमरीका ने इस रिपोर्ट की यह कहते हुए निंदा की है कि यह तथ्यहीन है.
अमरीकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सीन मैककॉर्मक ने कहा है, "अमरीका ने संयुक्त राष्ट्र की टीम को ग्वांतानामो बे जाने की इजाज़त नहीं दी इसका मतलब यह नहीं कि उन्हें ऐसी रिपोर्ट प्रकाशित करने का अधिकार मिल गया जो सुनी सुनाई बातों पर आधारित है और जिसमें कोई तथ्य नहीं है."
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार आयोग के निर्देश पर यह जाँच रिपोर्ट तैयार की गई है.
यह रिपोर्ट इस हफ़्ते के अंत तक प्रकाशित होनी है और संयुक्त राष्ट्र इसमें अमरीकी प्रतिक्रिया को भी शामिल करेगा.
जैसा कि जाँचकर्ताओं में शामिल नोवाक ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र अपनी रिपोर्ट में कोई तब्दीली नहीं करने जा रहा है.
उल्लेखनीय है कि ग्वांतानामो बे के बंदी गृह में उन लोगों को रखा गया है जिन पर कथित रुप से 'आतंकवाद' में शामिल होने का आरोप है.
इनमें से कई लोग अफ़ग़ानिस्तान में बंदी बनाए गए थे. इस समय वहाँ लगभग 500 क़ैदी हैं.