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सोमवार, 13 फ़रवरी, 2006 को 11:00 GMT तक के समाचार

सद्दाम ने अदालत में कहा- 'बुश मुर्दाबाद'

इराक़ के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन अपने ख़िलाफ़ चल रहे मुकदमे का पिछले महीने से बहिष्कार करने के बाद, सोमवार को बग़दाद में न्यायालय में पेश हुए.

जैसे ही वे न्यायालय में दाख़िल हुए उन्होंने 'बुश मुर्दाबाद' का नारा लगाया. उनका कहना था कि उन्हें अपनी इच्छा के ख़िलाफ़ न्यायालय में सुनवाई के लिए पेश होने पर मजबूर किया गया है.

वीडियोः सद्दाम ने अदालत में बुश विरोधी नारे लगाए

इसके बाद जज और प्रतिवादियों के बीच तीख़ी नोकझोंक हुई और प्रतिवादियों ने अपने वकीलों की अनुपस्थिति पर शिकायत दर्ज की.

ग़ौरतलब है कि सद्दाम हुसैन और उनके सात अन्य सहयोगियों पर 1982 में दुजैल गाँव में 148 लोगों की हत्या के सिलसिले में मुक़दमा चल रहा है. अगर उन्हें दोषी पाया जाता है तो फाँसी की सज़ा हो सकती है.

प्रतिवादी पक्ष की टीम मुकदमे से इसलिए पीछे हट गई है क्योंकि वह मुकदमे की प्रक्रिया और कार्रवाई की शैली से नाराज़ हैं.

'देशद्रोही मुर्दाबाद...बुश मुर्दाबाद...'

उन्होंने नए मुख्य जज राऊफ़ अब्दुल रहमान पर पक्षपात करने का आरोप लगाया है.

न्यायालय द्वारा नियुक्त सरकारी वकील उन वकीलों की जगह मुकदमें को दौरान मौजूद रहे.

महत्वपूर्ण है कि जनवरी 29 को इराक़ के पूर्व राष्ट्रपति और उनके साथियों ने न्यायालय से वॉकआउट किया था.

इसके बाद उन्होंने अदालत का बहिष्कार जारी रखने की धमकी दी थी.

लेकिन अदालत में सद्दाम और उनके सहयोगियों को पेश करने और यदि ज़रूरी हो तो बलपूर्वक लाने की बात उठी थी और फिर सोमवार को वे अदालत में पेश हुए.

अदालत में पेश होने पर सद्दाम हुसैन ने कहा, "वे मुझे बलपूर्वक यहाँ लाए हैं. आप मेरी ग़ैर-मौजूदगी में मेरे ख़िलाफ़ मुकदमा चलाएँ. क्या आप ऐसा करने में ख़ुद को सक्षम नहीं मानते?"

उनका नारे लगाए, "देशद्रोही मुर्दाबाद, देशद्रोही मुर्दाबाद, बुश मुर्दाबाद. उम्माह (इस्लामी क़ौम) ज़िंदाबाद...इस्लामी क़ौम ज़िंदाबाद..."

उनके क़रीबी रिश्तेदार बर्ज़ान इब्राहीम अल-तिकरीती की अदालत में सुरक्षाकर्मियों के साथ झड़प हुई.

सद्दाम और बर्ज़ान दोनो ही जज को कार्यवाही के दौरान परेशान करते रहे और चुप होने और बैठ जाने के आदेशों को नज़रअंदाज़ करते रहे.

सद्दाम फिर चीख़े, "ये अदालत नहीं है. ये अदालत नहीं है. ये तो खेल हो रहा है."

जज रहमान का कहना था कि वे उन्हीं क़ानून का पालन कर रहे हैं जो सद्दाम हुसैन के शासनकाल में बनाए गए थे.