सोमवार, 13 फ़रवरी, 2006 को 04:57 GMT तक के समाचार
चार्ल्स हावीलैंड
बीबीसी संवाददाता, नेपाल
नेपाल के प्रमुख माओवादी नेता प्रचंड ने कहा है कि भविष्य में नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र को या तो निर्वासित कर देना चाहिए या फिर 'जनता की अदालत' में उनकी पेशी होनी चाहिए.
माओवादी विद्रोह के 10 साल पूरे होने पर बीबीसी को दिए विशेष साक्षात्कार में प्रचंड ने ये बात कही.
प्रचंड ने कहा कि राजा के ख़िलाफ़ मुकदमा जनता की अदालत में होना चाहिए जिसमें उन्हें मौत की सज़ा भी हो सकती है. पर साथ ही उन्होंने कहा कि ये नेपाली लोगों को तय करना है.
प्रचंड ने पहली बार आमने सामने बैठकर प्रसारण के लिए साक्षात्कार दिया है. वे पिछले 25 सालों से भूमिगत रहे हैं.
'लोगों का फ़ैसला'
माओवादी नेपाल में चुनी हुई नई एसेंबली की माँग कर रहे हैं जो नया नेपाली संविधान लिख सकेगी.
प्रचंड ने कहा है कि एसेंबली के गठन से नेपाल एक गणराज्य बन जाएगा. प्रचंड ने कहा कि उनकी पार्टी लोगों के फ़ैसले को मानेगी.
प्रचंड ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "लोग जो भी फ़ैसला करेंगे, हम उसे मानने के लिए तैयार हैं."
जब माओवादी नेता से पूछा गया कि अगर लोगों ने राजशाही के हक़ में फ़ैसला दिया तो क्या वे उसे मानेगें, तो प्रचंड ने कहा कि अगर ऐसा होता है तो वे फ़ैसला स्वीकार करेंगे.
राजा ज्ञानेंद्र के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि राजा ने सत्ता अपने हाथ में लेकर समझौते के रास्ते बंद कर दिए हैं.
भारत और नक्सलवाद
भारत के कुछ राज्यों में सक्रिय नक्सलवादियों और नेपाल के माओवादियों के बीच संबंध के बारे में भी प्रचंड से सवाल पूछा गया.
इस पर प्रचंड ने कहा कि दोनों के बीच वैचारिक बंधन है लेकिन उनकी पार्टी क्रांति के आयात-निर्यात में विश्वास नहीं रखती.
प्रचंड का कहना था, "वैचारिक स्तर पर हम चाहते हैं कि हम इस आंदोलन को विश्व स्तर पर आगे बढ़ाएँ लेकिन व्यवहारिक स्तर पर हम नहीं चाहते कि एक देश की सेना दूसरे देश में जाकर लड़े."
हिंसा
नेपाल के ज़्यादातर बाहरी इलाक़ों पर माओवादियों का नियंत्रण है.पिछले दस सालों में नेपाल में माओवादी हिंसा में करीब 13 हज़ार लोग मारे जा चुके हैं.
प्रचंड ने कहा कि इतने लोगों के मारे जाने से वे दुखी हैं. प्रचंड ने बम धमाकों में बच्चों की मौत जैसी 'दुर्घटनाओं' पर भी दुख जताया.
प्रचंड ने कहा कि नेपाल सरकार को मिलने वाली विदेशी मदद के चलते काठमांडू पर सैन्य कब्ज़ा करना मुश्किल रहा है. उन्होंने कहा कि ऐसे किसी क़दम से नेपाली लोगों को बहुत नुकसान होगा.
राजा को फाँसी देने की प्रचंड की बात, नेपाली लोगों के लिए अचंभे वाली बात हो सकती है क्योंकि नेपाल में मौत की सज़ा की इजाज़त नहीं है.
नेपाल की राजनीतिक पार्टियों के साथ हाल ही में माओवादियों ने समझौता किया है और वे भी प्रचंड के बयान से असहज महसूस कर सकती हैं.