इंडोनेशिया ने कहा है कि डेनमार्क ने अपने राजनयिकों को देश से बाहर निकालने का फ़ैसला करने में जल्दबाज़ी की है.
विदेश मंत्री हसन विरायुदा ने कहा है कि इंडोनेशिया में डेनमार्क के दूतावास को पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई गई थी और ऐसे में राजनयिकों को वापस बुलाने का फ़ैसला करने की कोई ज़रूरत नहीं थी.
डेनमार्क ने शनिवार को इंडोनेशियाई राजधानी जकार्ता से अपने राजनयिकों को वापस निकालने की घोषणा करते हुए कहा था कि राजनयिकों को धमकियाँ मिल रही थीं.
डैनिश विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया था कि डेनमार्क की सरकार को दूतावासकर्मियों पर ख़तरे की ठोस जानकारी है.
डेनमार्क सरकार ने अपने नागरिकों को भी इंडोनेशिया छोड़ देने की सलाह दी है.
ख़तरा
दूसरी ओर इंडोनेशिया के विदेश मंत्री विरायुदा ने कहा है कि उन्हें डेनमार्क के दूतावास को किसी ख़तरे की जानकारी नहीं है.
उन्होंने कहा, "डेनमार्क(के दूतावास) ने टेलीफ़ोन पर धमकी मिलने की बात की है. लेकिन हमारे पास इसकी पुष्टि का कोई साधन नहीं है."
विरायुदा ने कहा, "हम फ़ैसले को कुछ ज़्यादा ही जल्दबाज़ी में लिया गया पाते हैं."
डेनमार्क इससे पहले सीरिया और ईरान से भी अपने राजनयिकों को वापस बुला चुका है.
इस बीच इंडोनेशिया में डेनमार्क के दूतावास से जुड़ी सेवाओं को पूरा करने का काम नीदरलैंड्स का दूतावास कर रहा है.
उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों इंडोनेशिया में राजधानी जकार्ता समेत कई शहरों में डेनमार्क में पैगंबर मोहम्मद के कार्टूनों के प्रकाशन के विरोध में जनप्रदर्शन हुए थे.
ऐसे ही एक प्रदर्शन के दौरान डेनमार्क के दूतावास पर अंडे फेंके गए थे.