ईरान ने धमकी दी है कि अगर उस पर सीमा से अधिक दबाव बढ़ाया गया तो वह परमाणु अप्रसार संधि से अलग हो सकता है.
ईरानी राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने कहा है कि अगर ईरानी जनता के हक़ को नहीं माना गया तो उन्हें अपनी "नीतियों पर फिर से विचार करना होगा."
राष्ट्रपति अहमदीनेजाद ने ये बातें 1979 में हुई इस्लामी क्रांति की 27वीं वर्षगाँठ के मौक़े पर कही हैं.
इससे पहले चार फ़रवरी को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) ने बहुमत से फ़ैसला किया था कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम की शिकायत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से की जाए.
लेकिन साथ ही अमरीकी राष्ट्रपति बुश ने कहा है कि ईरान के परमाणु मामले पर कूटनीतिक प्रयास बंद नहीं हुए हैं.
ईरान के मामले पर आईएईए की मार्च में होने वाली बैठक में एक बार फिर विचार किया जाएगा, आईएईए के बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स को अंतिम फ़ैसला करना है कि मामले को सुरक्षा परिषद में भेजा जाए या नहीं.
आईएईए के निदेशक मंडल के सदस्य देशों ने जो प्रस्ताव पारित किया है उसमें कहा गया है कि ईरान को अपना परमाणु कार्यक्रम तुरंत रोककर जाँचकर्ताओं के साथ पूर्ण सहयोग करना चाहिए.
पश्चिमी देशों और आईएईए के जाँचकर्ताओं को संदेह है कि ईरान परमाणु ऊर्जा की आड़ में हथियार कार्यक्रम चला सकता है.
ईरान हमेशा से कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और परमाणु ऊर्जा उसका अधिकार है जिसे वह छोड़ नहीं सकता.