पशु स्वास्थ्य विश्व संगठन (ओआईई) ने एक बयान में कहा है कि नाइजीरिया में पक्षियों में बर्ड फ़्लू का ख़तरनाक एच5एन1 वायरस पाया गया है.
पेरिस में आधारित इस संगठन का कहना है कि ये पहली बार है जब अफ़्रीका में बर्ड फ़्लू का मामला सामने आया है.
संगठन ने कहा है कि नाइजीरिया के फ़ार्म से कई पक्षियों के नमूने लिए गए और इटली की एक प्रयोगशाला ने नमूनों में एच5एन1 वायरस के होने के बारे में बताया है.
बर्ड फ़्लू का ये मामला नाइजीरिया के कदूना राज्य के एक पोल्ट्री फ़ार्म में पाया गया.
बर्ड फ़्लू
अधिकारियों ने कहा है कि उन्होंने बर्ड फ़्लू का फैलाव रोकने के लिए फ़ार्म में जानवरों की आवाजाही पर अकुंश लगाया था.
कदूना के पड़ोसी राज्य कानो में हाल ही में हज़ारों मुर्गियों की मौत हो गई थी.
अभी ये स्पष्ट नहीं है कि कदूना में बर्ड फ़्लू फैलने के ताज़ा मामले का संबंध कानो में हुई मुर्गियों की मौत से है या नहीं.
नाइजीरिया के कृषि मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा है कि वे जाँच कर रहे हैं कि कानो में मुर्गियों की मौत किसी सामान्य बीमारी से हुई है या नहीं.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि नाइजीरिया में बर्ड फ़्लू फैलने के गंभीर परिणाम हो सकते हैं.
नाइजीरिया में लाखों लोग जीवन यापन के लिए मुर्गियाँ पालते हैं.
उत्परिवर्तन
वैज्ञानिकों का कहना है कि हो सकता है कि पक्षियों के ज़रिए एशिया से यूरोप और अफ़्रीका तक बर्ड फ़्लू पहुँचा है लेकिन सीधा संबंध स्थापित करना मुश्किल है.
आशंका जताई जा रही है कि अफ़्रीका में बर्ड फ़्लू आसानी से फैल सकता है.
दिसंबर 2003 के बाद से एच5एन1 वायरस के चलते दुनिया में 80 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं. ज़्यादातर मौतें एशिया में हुई हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि वायरस का पक्षियों से मनुष्यों में फैलना आम बात नहीं है और ये तभी होता है अगर मनुष्य संक्रमित पक्षियों के संपर्क में रहे हों.
विशेषज्ञों के मुताबिक अगर वायरस का म्यूटेशन या उत्परिवर्तन हुआ तो 15 करोड़ लोगों की मौत हो सकती है.