रविवार, 05 फ़रवरी, 2006 को 01:01 GMT तक के समाचार
अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि दुनिया ईरान को परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं देगी.
पर साथ ही उन्होंने कहा कि कूटनीतिक प्रयास ख़त्म नहीं हुए हैं. बुश ने ईरान के नेताओं को चेतावनी दी कि उनके रवैए को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
राष्ट्रपति बुश ने कहा कि ईरान के नेताओं ने धमकी देने और अंतरराष्ट्रीय समझौते तोड़ने का जो रास्ता चुना है वो सफल नहीं होगा.
लेकिन साथ ही राष्ट्रपति बुश ने कहा कि ईरान का मामला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद भेजे जाने का मतलब ये नहीं है कि कूटनीतिक प्रयास ख़त्म हो गए हैं.
उनका कहना था कि ये तो कूटनीतिक प्रयासों की शुरुआत है ताकि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोका जा सके.
जॉर्ज बुश ने ईरान के लोगों से अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ सहयोग करने की अपील की.
इसे अमरीका की ओर से संकेत के तौर पर देखा जा रहा है कि वो अब भी ईरान के मामले पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ काम करना चाहता है.
अमरीकी राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान के रवैए के चलते वो दुनिया से अलग-थलग पड़ रहा है.
राष्ट्रपति बुश के भाषण में ये ज़िक्र भी था कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ईरान के लोगों को शांतिपूर्ण मक़सद के लिए परमाणु कार्यक्रम जारी रखने से नहीं रोक रहा.
बुश ने कहा कि ईरान का मामला सुरक्षा परिषद भेजने का मकसद सिर्फ़ यही था कि उसे परमाणु हथियार बनाने से रोका जा सके.
निगरानी बंद
उधर ईरान ने अपने परमाणु मामले की शिकायत सुरक्षा परिषद में किए जाने के फ़ैसले के बाद अपने परमाणु केंद्रों की अंतरराष्ट्रीय निगरानी को तत्काल रोकने की घोषणा की है.
ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने देश की परमाणु संस्था को आदेश दिया है कि वह तत्काल प्रभाव से इस निगरानी में सहयोग देना बंद कर दे.
संयुक्त राष्ट्र की परमाणु संस्था अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के निरीक्षक ईरान के परमाणु केंद्रों का अचानक निरीक्षण कर सकते थे.
ईरानी राष्ट्रपति ने कहा है कि ईरान अब केवल परमाणु अप्रसार संधि के दायरे के भीतर रहकर ही आईएईए के साथ सहयोग करेगा.
इससे पहले शनिवार को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम की शिकायत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से करने का फ़ैसला किया.
आईएईए के निदेशक मंडल के 35 सदस्य देशों में से 27 ने इस के समर्थन में वोट दिया जबकि तीन देशों ने इसके विरोध में.