शनिवार, 04 फ़रवरी, 2006 को 14:06 GMT तक के समाचार
ईरान के परमाणु कार्यक्रम की शिकायत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भेजने का समर्थन करने वाले देशों में रूस, चीन, अमरीका, फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन शामिल हैं.
पाँच देशों अल्जीरिया, बेलारूस, इंडोनेशिया, लीबिया और दक्षिण अफ्रीका इस मतदान में हिस्सा नहीं लिया.
तीन देशों, वेनेज़ुएला, क्यूबा और सीरिया ने प्रस्ताव के खिलाफ वोट डाला.
आईएईए के प्रवक्ता पीटर जेंकिन्स ने प्रस्ताव पारित होने के बाद कहा, "ये ईरान को कड़ा संदेश है कि वहाँ चल रही गतिविधियों और परमाणु कार्यक्रम पर किसी को भरोसा नहीं है. बोर्ड के सदस्य ये समझ नहीं पा रहे हैं कि ईरान को इस वक़्त यूरेनियम संवर्धन करने की इतनी क्यों इच्छा है."
सुरक्षा परिषद के जल्द ही कोई कदम उठाने की संभावना नहीं है, आईएईए के इस निर्णय के बाद माना जा रहा है कि ईरान के ख़िलाफ़ प्रतिबंध लगाने का रास्ता खुल सकता है.
कूटनीतिज्ञों का मानना है कि अब ईरान के पास यूरेनियम संवर्धन रोकने की अंतरराष्ट्रीय मांगें मानने के लिये एक महीने का समय है.
ईरान
प्रस्ताव पारित होने के बाद ईरान के एक वरिष्ठ परमाणु अधिकारी जवाद वायेदी ने कहा, "ये प्रस्ताव राजनीति से प्रेरित है और इसका कोई कानूनी आधार नहीं है. आईएईए के सदस्य देशों के बीच सर्वसम्मति न होना ये दर्शाता है कि इस मामले पर कोई अंतरराष्ट्रीय सहमति नहीं है, ईरान अब प्रतिक्रिया में पूरे तौर पर यूरेनियम संवर्धन शुरु कर देगा."
अमरीका, ब्रिटेन जर्मनी और फ्रांस जैसे देशों का कहना है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने के उद्देश्य से यूरेनियम संवर्धन कर रहा है लेकिन ईरान इन आरोपों से लगातार इनकार करता रहा है.
आईएईए में अमरीका के अधिकारी ग्रेगोरी शूल्ट ने कहा, "हालाँकि ईरान का मामला अब सुरक्षा परिषद को सौंप दिया गया है, परिषद के पाँच स्थाई सदस्य़ों ने फैसला किया है कि वो कोई कदम उठाने से पहले मार्च में महानिदेशक की रिपोर्ट आने का इंतजार करेंगे. ईरान को दुनिया को धमकियाँ देना छोड़कर दुनिया की बात सुननी चाहिए ताकि वो दुनिया का भरोसा फिर जीत सके."
रूस, चीन और भारत जैसे देशों का अभी भी कहना है कि ईरान के मामले को आपसी बातचीत के ज़रिए आईएईए में ही सुलझाना चाहिए और इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में नहीं ले जाना चाहिए.