शुक्रवार, 03 फ़रवरी, 2006 को 21:06 GMT तक के समाचार
अमरीका और ब्रिटेन ने उन यूरोपीय अख़बारों की आलोचना की है जिन्होंने पैगंबर मोहम्मद के कार्टूनों को फिर से छापा. जिस कारण कई मुसलमानों की भावनाएँ आहत हुईं और कई देशों में उन्होंने प्रदर्शन किए.
वॉशिंगटन में विदेश मंत्रालय ने पैगंबर मोहम्मद के कार्टूनों को 'अपमानजनक' बताया और कहा कि लोगों में धार्मिक और नस्लवादी घृणा फैलाना स्वीकार नहीं किया जा सकता.
ब्रिटेन के विदेश मंत्री जैक स्ट्रॉ ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता अपमान करने का अधिकार नहीं देती. पहली बार पैगंबर मोहम्मद के कार्टून पिछले साल डेनमार्क में छपे थे.
शुक्रवार को डेनमार्क के प्रधानमंत्री एनर्स फ़ॉ रासमूसिन ने कई विदेशी राजदूतों से मुलाक़ात की.
मुलाक़ात के बाद मिस्र के राजदूत को यह कहते हुए बताया गया कि प्रधानमंत्री रासमूसिन को स्पष्ट तौर पर माफ़ी मांगनी चाहिए.
लेकिन डेनमार्क के प्रधानमंत्री रासमूसिन का कहना है कि वे किसी अख़बार की कार्रवाई पर माफ़ी नहीं मांग सकते लेकिन वे इस घटना से दुखी हैं.
विरोध प्रदर्शन
इस बीच पैगंबर मोहम्मद के कार्टूनों पर विरोध प्रदर्शन जारी है. इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में प्रदर्शनकारियों ने डेनमार्क के दूतावास में घुसने की कोशिश की.
विरोध प्रदर्शन उस समय शुरू हुए जब एक इंडोनेशियाई अख़बार ने पैगंबर मोहम्मद के कार्टून अपनी वेबसाइट पर प्रदर्शित किए. बाद में उसे इसे वापस लेने पर मजबूर होना पड़ा.
इराक़, मिस्र और तुर्की के कई शहरों में भी विरोध प्रदर्शन हुए. लेकिन शुक्रवार को कई यूरोपीय अख़बारों ने कार्टून को छापा.
इस बीच इराक़ के शीर्ष धार्मिक नेता अयातुल्ला अली अल सिस्तानी ने कार्टूनों की आलोचना की लेकिन उन्होंने मुस्लिम समाज के 'भटक गए वर्ग' की यह कहकर आलोचना की कि वे अपने विश्वास की काली और विकृत छवि को पेश कर रहे हैं.
फ़लस्तीनियों ने रमल्ला और पश्चिमी तट में अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखा. अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने मुसलमानों से क्षमाशील बनने की अपील की और कहा कि कार्टूनों को दो सभ्यताओं के बीच विवाद का कारण नहीं बनना चाहिए.
पाकिस्तानी संसद के ऊपरी सदन ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित करके इन कार्टूनों की आलोचना की.
जबकि फ़्रांस के विदेश मंत्री फिलीप डूस्ट ब्लेज़ी ने मुसलमानों के विरोध प्रदर्शन को अस्वीकार्य बताया लेकिन कार्टूनों की भी आलोचना की.
वेटिकन सिटी के कार्डिनल अकीले सिल्वेस्ट्रीनी ने कार्टूनों की आलोचना करते हुए कहा कि पश्चिमी सभ्यता को अपनी सीमा जाननी चाहिए.