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गुरुवार, 02 फ़रवरी, 2006 को 19:25 GMT तक के समाचार

कार्टून विवाद पर प्रतिक्रियाएँ

डेनमार्क और यूरोप के कई अन्य देशों के अख़बारों में पैगंबर मोहम्मद के कार्टून के प्रकाशन को लेकर बढ़ा विवाद अब यूरोप और मुस्लिम देशों के बीच एक कूटनीतिक संकट बनता जा रहा है.

मुस्लिम देशों में इसे लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, जबकि पश्चिम देशों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्ष में बयान आ रहे हैं.

प्रस्तुत हैं विभिन्न देशों के नेताओं की कुछ प्रतिक्रियाएँ-

विचार, अभिव्यक्ति और प्रेस की आज़ादी का हम आदर करते हैं, लेकिन इसके आधार पर धर्मों और धार्मिक मान्यताओं का अपमान नहीं किया जाना चाहिए.
-होस्नी मुबारक, मिस्र के राष्ट्रपति

पैगंबर मोहम्मद के अपमान का कोई भी कृत्य एक अरब से ज़्यादा मुसलमानों का अपमान है. ऐसा कृत्य दोबारा नहीं होना चाहिए.
-हामिद करज़ई, अफ़गानिस्तान के राष्ट्रपति

हम लोकतंत्र के संचालन से जुड़े एक बुनियादी मुद्दे पर बहस कर रहे हैं. यह कहना ग़लत नहीं होगा कि यह अब कहीं बड़ा मुद्दा बन चुका है.
-एनर्स फ़ो रासमूसिन, डेनमार्क के प्रधानमंत्री

हम उम्मीद करते हैं कि संबंधित सरकारें मामले की संवेदनशीलता को समझेंगी. हम आगाह करना चाहेंगे कि इस मुद्दे पर भावनाएँ भड़क भी सकती हैं.
-अहमद क़ुरई, निवर्तमान फ़लस्तीनी प्रधानमंत्री

हम उम्मीद करते हैं कि वैटिकन जैसे धार्मिक संस्थान इस मुद्दे पर अपनी राय स्पष्ट करेंगे.
-प्रिंस नयेफ़, सऊदी गृह मंत्री

अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर धर्मों के अपमान को उचित नहीं ठहराया जा सकता.
-यूरी थैमरिन, इंडोनेशियाई विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता

ये बिल्कुल स्पष्ट हो जाना चाहिए कि हिंसा, धमकी, बहिष्कार का आहवान और प्रेस की आज़ादी पर लगाम लगाने की माँग अस्वीकार्य है.
-फ़्रैंको फ़्रैटिनी, यूरोपीय संघ के न्याय आयुक्त

स्वतंत्रता की भावना का पालन सहनशीलता, धर्मों और मान्यताओं के आदर की भावना के साथ-साथ होना चाहिए जोकि हमारे देश की धर्मनिरपेक्षता का आधार हैं.
-फ़िलिप डूस्ट ब्लेज़ी, फ़्रांसीसी विदेश मंत्री