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मंगलवार, 31 जनवरी, 2006 को 10:03 GMT तक के समाचार

हमास ने अंतरराष्ट्रीय माँग ठुकराई

फ़लस्तीनी चरमपंथी संगठन हमास ने हिंसा का रास्ता छोड़ने और इसराइल को मान्यता देने के अंतरराष्ट्रीय समुदाय के आहवान को नामंज़ूर कर दिया है.

हमास के एक प्रवक्ता मुशीर अल मसरी ने मंगलवार को कहा कि इस तरह की माँग मानने से सिर्फ़ इसराइल का ही हित सधेगा और इससे फ़लस्तीनियों को कोई फ़ायदा नहीं होने वाला है.

संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ, अमरीका और चीन के प्रतिनिधियों ने हमास की जीत के मामले पर सोमवार को लंदन में बैठक की जिसके बाद इस तरह का अनुरोध जारी किया गया कि हमास इसराइल के अस्तित्व अधिकार को स्वीकार करे.

इन देशों ने कहा कि हमास के नेतृत्व वाली संभावित फ़लस्तीनी सरकार को अगर अंतरराष्ट्रीय सहायता हासिल करना जारी रखना चाहती है तो उसका अहिंसा के प्रति संकल्पबद्ध होना ज़रूरी है.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने भी कहा कि फ़लस्तीनी अथॉरिटी को भविष्य में दी जानेवाली सहायता नई फ़लस्तीनी सरकार की नीतियों पर निर्भर करेगी.

उनका कहना था कि यह सरकार की अहिंसा के प्रति नीति, इसराइल को मान्यता देने और पुराने समझौतों को मान्यता देने पर निर्भर करेगी.

साथ ही उन्होंने फ़लस्तीन इलाक़ों में यहूदी बस्ती के विस्तार और पश्चिमी तट पर इसराइल के जाँच चौकियाँ स्थापित करने पर भी चिंता जताई.

अन्नान ने मध्यस्थता कर रहे संयुक्त राष्ट्र, अमरीका, यूरोपीय संघ और रूस की लंदन में बैठक के बात ये बातें कहीं.

सहायता

हमास के एक सांसद अल मिसरी ने कहा है कि उनका संगठन यह सुनिश्चित करेगा अंतरराष्ट्रीय सहायता का इस्तेमाल सिर्फ़ क़ानूनी उद्देश्यों के लिए हो.

ग़ौरतलब है कि हमास ने फ़लस्तीनी संसदीय चुनाव में बहुमत हासिल किया है जिसके बाद अमरीका और यूरोप ने कहा है कि हमास जब तक हिंसा का रास्ता नहीं छोड़ेगा और इसराइल को मान्यता नहीं देगा तब तक उसके साथ कोई राजनीतिक रिश्ता नहीं रखा जाएगा.

सोमवार को तो ऐसी ख़बरें भी आई थीं कि अमरीका और यूरोपीय संघ ने चेतावनी दी थी कि अगर हमास हिंसा का रास्ता छोड़ने और इसराइल को मान्यता की घोषणा नहीं करता तो फ़लस्तीनियों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता बंद की जा सकती है.

हमा संगठन के नेता इसमाइल हनियाह ने सोमवार को यूरोपीय संघ से अपील की थी कि वो फ़लस्तीनियों को दी जाने वाली आर्थिक मदद बंद न करे.