रविवार, 29 जनवरी, 2006 को 13:56 GMT तक के समाचार
इराक़ के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन पर चल रहे मुक़दमे की रविवार को सुनवाई शुरु हुई लेकिन दिन भर गरमागरम बहस के बाद सुनवाई बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी गई.
सद्दाम हुसैन ने सुनवाई शुरू होने के कुछ देर बाद ही अदालत से वॉकआउट कर दिया.
अदालत में मौजूद एक बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अदालत के नए मुख्य जज रऊफ़ अब्दुल रहमान और बचाव पक्ष के बीच दिन भर एक तरह से नाक की लड़ाई चलती रही.
सद्दाम हुसैन के वकीलों की टीम अदालत से बाहर चली गई तो सद्दाम हुसैन ने भी विरोध प्रदर्शन करते हुए अदालत से वॉकआउट किया.
उसके बाद सद्दाम हुसैन के दो साथी भी उनके पीछे-पीछे अदालत से बाहर चल गए.
मुक़दमे के प्रभारी न्यायाधीश रिज़गर अमीन के इस्तीफ़े और नए मुख्य न्यायाधीश रऊफ़ अब्दुल रहमान के पद संभालने के बाद ये पहली सुनवाई थी.
इस विशेष अदालत के मुख्य न्यायाधीश रऊफ़ अब्दुल रहमान ने सद्दाम हुसैन के रिश्ते के भाई और मुक़दमे के एक अभियुक्त बरज़ान अल तिकरिती को अदालत से बाहर भेजने का आदेश दिया था जिसके बाद सद्दाम हुसैन भी अदालत से बाहर चले गए.
ग़ौरतलब है कि सद्दाम हुसैन और उनके सात अन्य सहयोगियों पर 1982 में दुजैल गाँव में 148 लोगों की हत्या के सिलसिले में मुक़दमा चल रहा है. अगर उन्हें दोषी पाया जाता है तो फाँसी की सज़ा हो सकती है.
रविवार को जब अदालत में बहस शुरू हुई तो कैंसर से पीड़ित तिकरिती ने अपनी बीमारी और इलाज के बारे में एक लंबी शिकायत दर्ज करानी शुरू की. बस इसी पर अदालत में गरमागरमी हो गई.
लेकिन जज रहमान ने तुरंत अपने विशेषाधिकार का प्रयोग किया और कार्यवाही पर नियंत्रण पाते हुए तिकरिती को अदालत से बाहर निकालने का आदेश दे दिया. तिकरिती को ज़बरदस्ती अदालत से बाहर निकाला गया.
इसके बाद जज रहमान ने बचाव पक्ष के वकीलों से कहा कि उन्होंने ऐसा माहौल पैदा कर दिया है जिसमें अभियुक्त ये सोच सकते हैं कि वे लंबी तक़रीरें कर सकते हैं और अदालत के प्रति असम्मान दिखा सकते हैं.
उसके बाद बचाव पक्ष के एक वकील को अदालत से बाहर निकाला गया और परिणामस्वरूप सद्दाम हुसैन के बचाव पक्ष के वकीलों के पूरे दल ने अदालत का वॉकआउट कर दिया.
जिसके बाद सद्दाम हुसैन की जज रहमान के साथ ज़ोरदार बहस हुई और वह ये कहते हुए अदालत से चले गए कि वह उनकी ग़ैरहाज़िरी में मुक़दमा चलाएँ.
सद्दाम हुसैन ने जज रहमान पर आरोप लगाया कि वह अपने प्राधिकार का ग़लत इस्तेमाल कर रहे हैं "क्योंकि जब तक दोष साबित नहीं हो जाता वह निर्दोष हैं."
सद्दाम हुसैन ने इस गरमागरम बहस के दौरान ही जज रहमान की तरफ़ चुनौती के अंदाज़ में हाथ भी उठाया.
इस के बाद जज रहमान ने कह दिया कि सद्दाम हुसैन को भी अदालत से बाहर निकाला जाए और उन्हें अदालत से बाहर निकाल दिया गया.
उनकी ग़ैरहाज़िरी में अदालत की कार्यवाही जारी रही और दुजैल गाँव से एक गवाह ने पर्दे के पीछे से गवाही दी.
जब बचाव पक्ष के सभी वकील बाहर चले गए तो जज ने कहा कि उनके लिए सरकार वकील नियुक्त करेगी जो उनके अधिकारों की पूरी हिफ़ाज़त करेंगे.
बिखरा मुक़दमा
अभी तक मुक़दमे के दौरान कई तरह की बाधाएँ आती रही हैं जिसके कारण अक्तूबर 2005 में मुक़दमा शुरू होने के बाद से अभी तक केवल सात दिन सुनवाई हो सकी है.
इस दौरान मुक़दमे से जुड़े न्यायाधीशों की योग्यता पर सवाल उठाए गए हैं और मुक़दमे में राजनीतिक दखलंदाज़ी के भी आरोप लगे हैं.
बग़दाद स्थित बीबीसी संवाददाता निकोलस विचेल का कहना है कि अभी इस तरह की धारणा बनती जा रही है कि मुक़दमा बिल्कुल बिखर सा गया है.
सद्दाम मुक़दमे के एक प्रमुख न्यायाधीश रिज़गार अमीन ने पिछले महीने इस्तीफ़ा दिया था.
उन्होंने ये फ़ैसला सरकारी अधिकारियों के इस आरोप के बाद लिया कि वे सुनवाई के दौरान अभियुक्तों को लेकर बहुत नरम रहते हैं.
वहीं उनसे नीचे के एक न्यायाधीश को इस आरोप के कारण हटाया गया कि वे सद्दाम हुसैन की बाथ पार्टी से जुड़े रहे हैं.
अब मुक़दमे की सुनवाई कराने के लिए रउफ़ अब्दुल रहमान नामक जिस न्यायाधीश को नियुक्त किया गया है उनकी अपने सहयोगियों के साथ सुनवाई के तौर-तरीक़े को लेकर मतभेद बताए जा रहे हैं.
इससे पहले सभी अभियुक्त 22 दिसंबर को अदालत में पेश किए गए थे.