फ़लस्तीनी चुनाव में चरमपंथी गुट हमास की जीत के बाद उपजी स्थिति पर विचार के लिए सोमवार को लंदन और ब्रसेल्स में दो उच्च स्तरीय बैठकें होनेवाली हैं.
इन बैठकों में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर जारी विवाद पर भी चर्चा होगी.
एक बैठक बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में होनी है जिसमें यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के विदेश मंत्री हिस्सा लेंगे.
दूसरी बैठक लंदन में होनी है जिसमें अमरीका, संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ और रूस के नेता फ़लस्तीनी चुनाव के परिणाम के बाद की स्थिति पर विचार करेंगे.
ये चारों देश मध्य पूर्व में शांति के लिए प्रयास करनेवाली चार महत्वपूर्ण शक्तियाँ मानी जाती हैं.
यूरोपीय संघ और अमरीका
जर्मन चांसलर एंगेला मैरकल ने एक बार फिर कहा है कि हमास के नेतृत्व वाली सरकार अगर इसराइल को मान्यता नहीं देती या हिंसा नहीं त्यागती तो यूरोपीय संघ उसे वित्तीय सहायता नहीं देगा.
एंगेला मैरकल फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास से मिलेंगी मगर वे किसी अन्य फ़लस्तीनी नेता से मुलाक़ात नहीं करेंगी.
अमरीका की विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने भी अमरीका द्वारा दी जानेवाली आर्थिक सहायता में कटौती करने की अमरीका की धमकी दोहराई है.
यूरोपीय संघ फ़लस्तीनी प्रशासन को सबसे अधिक आर्थिक सहायता देता है. वह हर साल फ़लस्तीनियों को 60 करोड़ 60 लाख डॉलर की आर्थिक मदद देता है.
अन्य दाता शक्तियों के साथ अब जापान और कुछ अरब देशों ने भी सहायता जारी रखने पर दोबारा विचार शुरू कर दिया है.
इसराइल के कार्यवाहक प्रधानमंत्री एहुद ओल्मर्ट ने कहा है कि इसराइल फ़लस्तीनियों को ऐसी कोई राशि नहीं देगा जिसका इस्तेमाल आतंकवाद के लिए हो सकता हो.
लेकिन उन्होंने ये स्पष्ट नहीं किया कि इसराइल टैक्स से होनेवाली आय में से फ़लस्तीनी प्रशासन को भुगतान करना जारी रखेगा या नहीं.