गुरुवार, 26 जनवरी, 2006 को 10:50 GMT तक के समाचार
दो अलग-अलग रिपोर्टों में कहा गया है कि इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान में अपने अभियानों की वजह से अमरीकी सेना पर ख़तरनाक रूप से दबाव पड़ रहा है.
एक रिपोर्ट पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के दौर के कुछ अधिकारियों ने लिखी है जिसमें कहा गया है कि बार-बार तैनाती से सैनिकों पर दबाव बढ़ रहा है जो बहुत ख़तरनाक है और इसके दीर्घकालीन प्रभाव हो सकते हैं.
दूसरी रिपोर्ट के लिए अमरीकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने ख़ुद आदेश दिया था और यह अभी रिलीज़ की जानी है लेकिन इसमें सेना को 'ख़तरनाक हद तक दबाव' में बताया गया है.
अमरीकी रक्षा मंत्री डोनाल्ड रम्सफ़ेल्ड ने इन दावों को ख़ारिज करते हुए इन्हें अप्रासंगिक और गुमराह करने वाले बताया है.
ग़ौरतलब है कि इराक़ में क़रीब एक लाख 38 हज़ार अमरीकी सैनिक तैनात हैं. इसके अलावा अफ़ग़ानिस्तान और कोसोवो में भी अमरीकी सैनिक तैनात हैं.
'अत्यधिक दबाव'
डेमोक्रेटिक पार्टी के कांग्रेस सदस्यों ने जो रिपोर्ट लिखवाई है उसे लिखने वालों में पूर्व रक्षा मंत्री विलियम पैरी और पूर्व विदेश राज्य मंत्री मेडलीन अलब्राइट के भी नाम हैं.
इस रिपोर्ट का कहना है कि अमरीकी सेना ने हाल के अभियानों में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है लेकिन वह "अत्यधिक दबाव" में है.
रिपोर्ट के अनुसार, "अगर इस दबाव को जल्दी दूर नहीं किया गया तो सैनिकों पर इसके बेहद ख़तरनाक और दीर्घकालीन असर हो सकते हैं."
रिपोर्ट में बार-बार विदेशों में तैनितायाँ होने से सेना में नई भर्तियाँ करने और मौजूदा सैनिकों को सेना में बनाए रखने में समस्या की आशंका व्यक्त की गई है.
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि बुश प्रशासन यह आकलन करने में नाकाम रहा है कि इराक़ पर हमले के बाद की स्थिति में कितने सैनिकों और किन-किन उपकरणों की ज़रूरत होगी जिससे "सेना के बिखराव का ख़तरा@ पैदा हो गया है.
'बिखराव नहीं'
दूसरी रिपोर्ट पेंटागन के विशेषज्ञ एंड्रयू क्रेपिनेविच ने तैयार की है जिसमें कहा गया है कि हो सकता है कि इराक़ में जितनी अमरीकी सेना तैनात है वह वहाँ विद्रोही गतिविधियों पर क़ाबू पाने में कामयाब न हो सके.
रिपोर्ट में उन समस्याओं का भी जिक्र किया गया है जो पिछले साल सेना के भर्ती लक्ष्यों को हासिल करने में आईं.
उधर रक्षा मंत्री डोनाल्ड रम्सफ़ेल्ड ने दोनों ही रिपोर्टों में दे गई चेतावनियों को यह कहते हुए ख़ारिज कर दिया कि "सेना में कोई बिखराव नहीं है."
डोनाल्ड रम्सफ़ेल्ड ने वाशिंगटन में कहा कि अमरीकी सेना अत्यधिक रूप से सक्षम है और जो भी रिपोर्ट यह कहती है कि सेना पर ख़तरनाक रूप से दबाव है तो 'वे तथ्यों को प्रस्तुत नहीं करती हैं'.
वाशिंगटन में बीबीसी संवाददाता एडम ब्रुक्स का कहना है कि रिपोर्टों में कांग्रेस के कुछ सदस्यों के विचार प्रतिबंबित हुए हैं और यहाँ तक कि सेना के भीतर भी ऐसे विचार हैं.
इन लोगों का विचार है कि अगर इराक़ में अमरीकी सैनिक तैनाती लंबे समय तक चलती है या फिर अमरीका किसी नए संघर्ष में शामिल होता है तो अमरीकी सशस्त्र सेनाओं के लिए नई ज़िम्मेदारियों को निभाना मुश्किल हो सकता है.