गुरुवार, 26 जनवरी, 2006 को 09:57 GMT तक के समाचार
फ़लस्तीनी प्रधानमंत्री अहमद क़ुरई ने संसदीय चुनाव के नतीजों की मतगणना पूरी होने से पहले ही इस्तीफ़ा देने की घोषणा करते हुए कहा है कि हमास को नई सरकार बनानी चाहिए.
अहमद क़ुरई और उनके मंत्रिमंडल के इस्तीफ़े की घोषणा इन ख़बरों के बीच आई है कि चरमपंथी संगठन हमास आश्चर्यजनक रूप से जीत की तरफ़ बढ़ रहा है.
समाचार एजेंसी एएफ़पी क़ुरई ने पत्रकारों से कहा, "मैं राष्ट्रपति महमूद अब्बास को अपना इस्तीफ़ा देने जा रहा हूँ और हमास को अब नई सरकार का गठन करना चाहिए."
हमास ने 132 सीटों में 70 पर जीत हासिल करने का दावा किया है.
दस साल बाद हुए फ़लस्तीनी संसदीय चुनाव की मतगणना चल रही है और अंतिम परिणाम गुरूवार शाम तक आने की संभावना है.
हमास अपनी जीत का दावा भी कर रहा है हालाँकि इस बारे में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
हमास ने कहा है कि उसे आधे से ज़्यादा वोट मिल गए हैं और सत्तारुढ़ फ़तह पार्टी के सूत्रों का कहना है कि ऐसा लगता है कि हमास को बहुमत मिल गया है.
पहले आधिकारिक 'एग्ज़िट पोल' के अनुसार फ़तह को जहाँ 46 प्रतिशत मत मिले हैं, वहीं प्रतिद्वंद्वी चरमपंथी संगठन हमास को 39.5 प्रतिशत मत मिले हैं.
रामल्ला से बीबीसी संवाददाता जेम्स रेनॉल्ड्स के अनुसार अंतिम चुनाव परिणाम जो भी हो, इतना तो स्पष्ट है कि फ़लस्तीनी राजनीति में फ़तह का एकछत्र आधिपत्य नहीं रह गया है.
अहम भूमिका
बीबीसी संवाददाता के अनुसार हमास हार भी जाता है तो भी अब यह स्पष्ट हो गया है कि वह फ़लस्तीनी राजनीति में ज़्यादा महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और हो सकता है कि फ़लस्तीनी प्रशासन का भी हिस्सा बन जाए.
इसराइल के कार्यवाहक प्रधानमंत्री एहूद ओलमर्ट ने कहा है कि जिस फ़लस्तीनी सरकार में हमास शामिल होगा उनका देश उसके साथ बातचीत करने की स्थिति में नहीं होगा.
इसराइल हमास को 'आतंकवादी संगठन' मानता है.
अमरीका ने भी कहा है कि वह भी तब तक हमास के साथ कोई बातचीत नहीं करेगा जब तक कि वह हिंसा और अपनी इसराइल विरोधी नीति नहीं छोड़ देता.
फ़तह के घटे क़द के पीछे मुख्य कारण माना जा रहा है हमास का अपनी लोकप्रियता को चुनावी राजनीति में भुनाने में सफल रहना.
इस बीच फ़तह और हमास दोनों ने कहा है कि स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने की स्थिति में वो गठबंधन सरकार बनाने पर विचार करेंगे.
लेकिन इसराइल ने ऐसे किसी गठजोड़ की संभावना का विरोध करने का फ़ैसला किया है.
समाचार एजेंसियों के अनुसार इसराइल के कार्यवाहक प्रधानमंत्री एहुल ओल्मर्त ने कहा है कि हमास को उसके मौजूदा स्वरूप में फ़लस्तीनी प्रशासन का हिस्सा बनने नहीं दिया जाएगा.
उल्लेखनीय है कि हमास ने हमेशा कहा है कि वो इसराइल को मान्यता नहीं देता. हमास ने इसराइल के ख़िलाफ़ अनेक हिंसक कार्रवाइयों को भी अंजाम दिया है.