गुरुवार, 26 जनवरी, 2006 को 16:01 GMT तक के समाचार
फ़लस्तीनी चरमपंथी संगठन हमास ने बुधवार को हुए चुनाव में शानदार जीत दर्ज की है. फ़लस्तीनी चुनाव आयोग के अनुसार हमास को 132 में से 76 सीटें मिलीं हैं. फ़तह को 43 सीटें ही मिलीं.
फ़लस्तीनी चुनाव आयोग के अनुसार बुधवार को हुए चुनाव में 77 प्रतिशत मतदान हुआ था.
चुनाव में अपनी जीत के आसार देखते हुए पहले ही चरमपंथी संगठन हमास ने कहा था कि वह अन्य गुटों से बात करके एक राजनीतिक गठबंधन बनाना चाहता है.
हमास के एक प्रवक्ता सामी अबू ज़ुहरी ने कहा कि बातचीत में सत्ताधारी फ़तह पार्टी को भी शामिल किया जाएगा.
इस बीच फ़तह के एक वरिष्ठ सदस्य साएब एराकात ने कहा है कि फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास हमास को अगली सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करेंगे.
लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि फ़तह पार्टी इस सरकार में शामिल नहीं होगी. बुधवार को हुए फ़लस्तीनी चुनाव के आधिकारिक नतीजे जल्द ही आने वाले हैं.
सत्ताधारी फ़तह पार्टी ने हार स्वीकार कर ली है और प्रधानमंत्री अहमद क़ुरई ने त्यागपत्र देने की घोषणा की है. हमास के एक शीर्ष राजनेता इस्माइल हानिया ने कहा है कि बाहरी दुनिया को हमास से नहीं डरना चाहिए.
प्रतिक्रिया
लेकिन फ़लस्तीनी चुनाव में हमास की जीत को देखते हुए मध्य पूर्व में शांति प्रक्रिया पर सवाल उठाए जाने लगे हैं. इसराइल, अमरीका और यूरोपीय संघ के देश हमास को एक 'आतंकवादी संगठन' मानते हैं.
हमास की संभावित जीत पर प्रतिक्रिया व्यक्त करने हुए इसराइल ने कहा है कि वह हमास के साथ बातचीत नहीं करेगा.
अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने जहाँ फ़लस्तीनी चुनावी प्रक्रिया की सराहना की है, वहीं यह भी स्पष्ट कर दिया कि इसराइल का ख़ात्मा चाहने वालों के साथ वे कोई समझौता नहीं करेंगे.
ब्रिटेन के विदेश मंत्री जैक स्ट्रॉ ने कहा है कि हमास 'हिंसा और लोकतंत्र' का एक साथ इस्तेमाल नहीं कर सकता और अगर उसने ऐसा किया तो यह फ़लस्तीनी लोगों के साथ छल होगा.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने कहा है कि कोई भी गुट अगर लोकतांत्रिक संसदीय प्रक्रिया में शामिल होना चाहता है तो उसे हथियार छोड़ना पड़ेगा.
यूरोपीय संघ का कहना है कि अगर हमास यूरोपीय संघ का सहयोग चाहता है तो उसे शांति प्रक्रिया के लिए काम करना होगा.
दशकों तक फ़लस्तीनी राजनीति पर फ़तह पार्टी का दबदबा रहा है. इस पार्टी का गठन दिवंगत यासिर अराफ़ात ने किया था.