गुरुवार, 26 जनवरी, 2006 को 13:32 GMT तक के समाचार
ईरान के परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे पर शीर्ष वार्ताकार अली लरीजानी ने रूस के उस प्रस्ताव को सहायक बताया है जिसे ईरान के परमाणु कार्यक्रम संकट को हल करने के लिए पेश किया गया है.
ग़ौरतलब है कि यह पेशकश की गई थी कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम के लिए यूरेनियम संवर्धन रूस में हो जिसके लिए ईरान पहले तो राज़ी नहीं था लेकिन बाद में सहमत हो गया.
अली लरीजानी ने गुरूवार को चीन की एक दिन की यात्रा के दौरान कहा कि यह समय ईरान के ख़िलाफ़ प्रतिबंध लगाने का नहीं है. इस यात्रा के दौरान बेजिंग में उन्होंने चीन के विदेश मंत्री से मुलाक़ात की.
अमरीका और उसके यूरोपीय सहयोगी देश अगर ईरान के परमाणु कार्यक्रम मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भेजना चाहते हैं और इसके लिए उन्हें चीन के समर्थन की ज़रूरत होगी क्योंकि चीन के पास वीटो अधिकार है.
ईरान के परमाणु वार्ताकार अली लरीजानी ने बेजिंग यात्रा का इस्तेमाल चीन का समर्थन जुटाने के लिए किया ताकि यह मामला सुरक्षा परिषद में नहीं भेजा जा सके.
अली लरीजानी ने चीन के विदेश मंत्री ली झाओज़िंग से मुलाक़ात के बाद कहा कि दोनों देशों की स्थिति काफ़ी नज़दीकी है लेकिन उन्होंने इस बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं दी.
अली लरीजानी ने कहा है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम के लिए यूरेनियम संवर्धन रूसी ज़मीन पर किए जाने का प्रस्ताव फलदायी है लेकिन इस पर अभी और विचार-विमर्श की ज़रूरत है.
अली लरीजानी ने कहा कि ईरान के ख़िलाफ़ प्रतिबंध लगाने का यह उचित समय नहीं है.
रूसी प्रस्ताव का चीन ने भी स्वागत किया था और चीन ने इस प्रस्ताव को गतिरोध दूर करने के लिए अच्छा प्रयास क़रार दिया है.
चीन के पास सुरक्षा परिषद में वीटो अधिकार है इसलिए वह इस पूरे मामले में अहम भूमिका निभा सकता है और ईरान के अलावा अमरीका और उसके सहयोगी देशों के राजदूत चीन की यात्रा करते रहे हैं.
इस मामले का अगला पड़ाव सोमवार को तब आएगा जब सुरक्षा परिषद के सदस्यों और जर्मनी के प्रतिनिधियों के बीच लंदन में मुलाक़ात होगी और कोई आम राय बनाने की कोशिश की जाएगी.