बुधवार, 25 जनवरी, 2006 को 12:56 GMT तक के समाचार
नॉर्वे के एक मध्यस्थ ने कहा है कि श्रीलंका सरकार और तमिल टाइगर विद्रोही स्विट्ज़रलैंड में बातचीत करने के लिए सहमत हो गए हैं.
हाल के दिनों में हिंसा में बढ़ोतरी और वार्ता की जगह को लेकर हुई असहमति के चलते श्रीलंका में युद्ध फिर से शुरू होने की आशंका बढ़ गई है.
नॉर्वे के विशेष दूत एरिक सोल्हाइम ने कहा है कि ये बातचीत फ़रवरी में जिनीवा में शुरू हो सकती है.
पहले तमिल विद्रोहियों ने कहा था कि वे सरकार से तभी मिलेंगे अगर बातचीत नॉर्वे में होती है.
एरिक सोल्हाइम श्रीलंका में तमिल विद्राहियों और श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के साथ बात कर रहे हैं.
'संघर्षविराम पर ध्यान'
सोल्हाइम ने विद्रोही नेता प्रभाकरन के साथ बातचीत के बाद कहा, “दोनों पक्ष सहमत थे कि संघर्षविराम को बेहतर तरीके से लागू करने के लिए एक साथ काम करने की ज़रूरत है.”
समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक़ जब नॉर्वे के विशेष दूत से पूछा गया कि क्या दोनों पक्ष हमले बंद करने पर सहमत हो गए हैं तो उनका कहना था कि ‘ये समझौता बैठक में ही हो सकता है.’
तमिल विद्रोहियों के प्रवक्ता ने कहा है कि आगामी बातचीत में संघर्षविराम को सुदृढ़ बनाने पर ज़ोर दिया जाएगा.
विद्रोहियों के मुख्य वार्ताकार ने कहा, “हमने कहा है कि हमारे स्तर पर हिंसक गतिविधियाँ नहीं होगी." उन्होंने सरकार से भी ऐसा ही करने के लिए कहा.
हिंसा
श्रीलंका सरकार और तमिल विद्रोहियों के बीच 2002 में संघर्षविराम के लिए समझौता हुआ था लेकिन दोनों पक्ष एक दूसरे पर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाते आए हैं.
तमिल विद्रोहियों का कहना है कि श्रीलंका सरकार अर्धसैनिक बलों का समर्थन करती आई है जबकि सरकार की माँग है कि विद्रोही सैनिकों पर हमले करना बंद करे.
पिछले साल नवंबर में महिंदा राजपक्षे के प्रधानमंत्री बनने के बाद से श्रीलंका में हिंसा में बढ़ोतरी हुई है.
दिसंबर के बाद से कम से कम 120 लोग हिंसा में मारे जा चुके हैं जिसमें 80 सैनिक और नाविक शामिल हैं.
श्रीलंका सरकार ने इन हमलों के लिए तमिल विद्रोहियों को दोषी ठहराया है जबिक विद्रोही इस बात से इनकार करते आएँ हैं.