शनिवार, 21 जनवरी, 2006 को 02:31 GMT तक के समाचार
पूर्वी तिमोर ने संयुक्त राष्ट्र को एक रिपोर्ट सौंपी है जिसमें इंडोनेशिया के शासनकाल में हुए मानवाधिकार उल्लंघनों का विवरण दिया गया है.
अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं की मदद से तैयार की गई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन 24 वर्षों तक पूर्वी तिमोर इंडोनेशिया के नियंत्रण में रहा, उस दौर में एक लाख से अधिक लोग मारे डाले गए या भूख और बीमारी से मरने दिए गए.
हज़ारों लोगों के बयानों पर आधारित लगभग ढाई हज़ार पन्ने की रिपोर्ट में कहा गया है कि इंडोनेशिया की सरकार ने पूर्वी तिमोर के लोगों को भूखा रखने को एक हथियार बना लिया था.
लेकिन इंडोनेशिया ने इस रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि दोनों देशों को अब भविष्य की ओर देखना चाहिए.
इंडोनेशिया के एक मंत्री युशरिल इज़ा महेंद्रा ने कहा, "हम पूर्वी तिमोर के साथ सदभाव और सहयोग क़ायम करना चाहते हैं, पीछे मुड़कर देखने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि उससे कुछ हासिल नहीं होगा."
पूर्वी तिमोर के राष्ट्रपति ज़ानाना गुस्माओ ने यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र के महासचिव कोफ़ी अन्नान को सौंपी है.
इस रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है लेकिन एक ऑस्ट्रेलियाई अख़बार ने रिपोर्ट के अंश प्रकाशित करके सनसनी फैला दी है.
खंडन
द ऑस्ट्रेलियन अख़बार में प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है, "बलात्कार, यौन उत्पीड़न और यातनाएँ देकर स्वतंत्रता की माँग करने वालों की हिम्मत तोड़ने की कोशिश की गई."
रिपोर्ट में कहा गया है कि लोगों को जान-बूझकर भूखा रखने की इंडोनेशिया की नीति के कारण 1975 से 1999 के बीच 85 हज़ार से अधिक लोगों की मौत हुई थी.
लेकिन इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री जुवोनो सुदर्सनो ने इसके जवाब में कहा, "वे आँकड़ों की लड़ाई लड़ रहे हैं, उस घटना की बात कर रहे हैं जो कभी हुई ही नहीं."
1975 में औपनिवेशिक शासक पुर्तगाल के हट जाने के बाद इंडोनेशिया ने पूर्वी तिमोर पर हमला करके कब्ज़ा कर लिया था.
लंबे संघर्ष और भारी हिंसा के बाद 1999 में पूर्वी तिमोर एक स्वतंत्र राष्ट्र बना.