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बुधवार, 18 जनवरी, 2006 को 01:38 GMT तक के समाचार

'नैटो को तालेबान से निपटना होगा'

उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नैटो) में अमरीकी राजदूत ने चेतावनी दी है कि ब्रिटेन की अगुआई वाली नैटो सेना को दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान और अल क़ायदा की बढ़ती गतिविधियों से निपटना पड़ेगा.

दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान में ब्रिटेन की अगुआई वाली नैटो सेना को कमान संभालना है. फ़िलहाल वहाँ अमरीकी सेना कमान संभाल रही है.

दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान की बढ़ती गतिविधि के कारण नीदरलैंड की सरकार ने मिशन में शामिल होने का फ़ैसला टाल दिया है.

लेकिन ब्रिटेन का कहना है कि उसने फ़ैसला कर लिया है कि वह ज़्यादा इंतज़ार नहीं करेगा. अभी ब्रिटेन को यह फ़ैसला करना है कि वह वहाँ कितने सैनिकों को भेजेगा.

आवश्यकता

नैटो में अमरीकी राजदूत विक्टोरिया नूलैंड ने कहा कि नैटो को दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान में विद्रोहियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई के लिए तैयार रहना चाहिए और इसके लिए मज़बूत लड़ाकू सैनिकों की ज़रूरत होगी.

हाल के दिनों में दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान में कई आत्मघाती हमले हुए हैं. रविवार को ही कनाडा के एक वरिष्ठ राजनयिक भी मारे गए थे.

बीबीसी के रक्षा मामलो के संवाददाता पॉल वुड का कहना है कि दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान की गतिविधि बढ़ रही है.

दो तालेबान कमांडरों ने पहले ही घोषणा की थी कि वे पाकिस्तान में स्थित अपने अड्डों से बड़ी संख्या में लड़ाकों को इस इलाक़े में लेकर आ रहे हैं जो आत्मघाती हमला करने के लिए तैयार हैं.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इसे कोरी धमकी नहीं समझना चाहिए. पिछले सप्ताह इस इलाक़े में चार आत्मघाती हमले हुए. इनमें से एक हमले में तो 20 अफ़ग़ान मारे गए.

ब्रितानी सैनिकों की अगुआई में नैटो सेना का दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान में जाने का मक़सद है पुनर्निर्माण कार्यों के लिए सुरक्षा की गारंटी लेना.

लेकिन नैटो में अमरीकी राजदूत का कहना है कि दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान के माहौल के बारे में कोई भ्रम में नहीं रहना चाहिए.