सोमवार, 16 जनवरी, 2006 को 20:17 GMT तक के समाचार
सुरक्षा परिषद के पाँच स्थाई देशों और जर्मनी ने लंदन में बैठक के बाद ईरान से अपने परमाणु संवर्द्धन कार्यक्रम को तत्काल बंद करने की माँग की है.
ईरान के परमाणु मुद्दे पर उसके साथ वार्ता करनेवाले तीन देशों - ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी - ने इस बारे में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा आयोग की आपात बैठक बुलाए जाने की भी माँग की है.
यूरोपीय देश परमाणु ऊर्जा आयोग से इस बारे में 2-3 फ़रवरी को बैठक कराने की माँग करेंगे जो बैठक के लिए तय समय से एक महीना पहले है.
ईरान के परमाणु विवाद पर अमरीका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, चीन और जर्मनी के प्रतिनिधियों ने सोमवार को लंदन में बंद कमरे में एक बैठक की.
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अंतरराष्ट्रीय महाशक्तियों के इस रूख़ के बाद उसके ख़िलाफ़ आर्थिक प्रतिबंध का रास्ता तैयार हो सकता है.
लेकिन चीन अभी भी प्रतिबंध का समर्थन नहीं करता लग रहा क्योंकि ऐसे किसी क़दम से ईरान से तेल की आपूर्ति पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है.
बैठक और चिंता
ईरान ने पिछले सप्ताह अपने तीन परमाणु केंद्रों पर लगी संयुक्त राष्ट्र की सील तोड़ दी थी.
इसके बाद अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में ख़ासी चिंता जताई गई.
पश्चिमी देशों का कहना है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है जबकि ईरान कहता है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है.
हल की उम्मीद
गतिरोध के बीच ही रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने ऐसे संकेत दिए हैं कि संकट का हल समझौते से निकल सकता है.
पुतिन ने कहा कि ईरान ने रूस के प्रस्ताव को ठुकराया नहीं है जिसमें ईरान को रूस में यूरेनियम के संवर्द्धन की पेशकश की गई है.
एक रूसी टेलीविज़न चैनल के अनुसार मॉस्को में ईरान के राजदूत ने रूसी प्रस्ताव की सराहना की है.
मगर अमरीका, ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी रूस और चीन को इस बात पर सहमत कराने की कोशिश कर रहे हैं कि ईरान के विरूद्ध कड़े क़दम उठाना चाहिए.
इस बीच संयुक्त राष्ट्र की परमाणु ऊर्जा एजेंसी आईएईए के अध्यक्ष मोहम्मद अल बारादेई ने कहा है कि वह यह पुष्टि नहीं कर सकते कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है.
ईरान की प्रतिक्रिया
ईरान का कहना है कि वह पश्चिमी देशों के दबाव के आगे नहीं झुकेगा.
उसने ये भी चेतावनी दी है कि अगर उसके ख़िलाफ़ प्रतिबंध लगे तो इससे अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं.
ईरान दुनिया में तेल का चौथा सबसे बड़ा निर्यातक देश है.
उधर सऊदी अरब के विदेश मंत्री शहज़ादा सऊद अल फ़ैसल ने ईरान के परमाणु संकट के लिए आंशिक रूप से पश्चिमी देशों को ही ज़िम्मेवार ठहराया है.
सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस सऊद अल फ़ैसल ने बीबीसी के साथ एक विशेष इंटरव्यू में कहा कि ईरान के राष्ट्रपति के बयान "चरम सीमा वाले" हैं लेकिन इस संकट का हल प्रतिबंधों से नहीं बल्कि कूटनीति से ही निकाला जा सकता है.
प्रिंस सऊद अल फ़ैसल भी आतंकवाद के मुद्दे पर एक सम्मेलन में भाग लेने के लिए लंदन आए हुए हैं.