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मंगलवार, 10 जनवरी, 2006 को 00:59 GMT तक के समाचार

शेरॉन की स्थिति 'अस्पष्ट'

इसराइल के प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन का इलाज कर रहे डॉक्टरों ने कहा है कि शेरॉन मशीनों के सहारे के बिना साँस तो ले पा रहे हैं लेकिन अभी उनकी मुश्किलें ख़त्म नहीं हुई हैं.

डॉक्टरों ने कहा है कि इन दिक्कतों के चलते शेरॉन की जान भी जा सकती है.

डॉक्टरों ने सोमवार को आहिस्ता-आहिस्ता दवाइयाँ कम करके शोरॉन को होश में लाने की कोशिश का फ़ैसला किया था ताकि उनके मस्तिष्क में हुए नुक़सान का अंदाज़ा लगाया जा सके.

येरूशलम में हदासाह अस्पताल में शेरॉन का इलाज चल रहा है. डॉक्टरों ने कहा है कि शेरॉन को ठीक होने में कई दिन लगेंगे.

डॉक्टरों ने कहा कि अभी भी शेरॉन खतरे से बाहर नहीं हैं. पर अस्पताल के निदेशक ने कहा कि शेरॉन साँस ले पा रहे हैं ये काफ़ी उत्साहजनक बात है.

उनका कहना था, "शेरॉन के दिमाग़ में किसी भी तरह की गतिविधि का ये पहला संकेत है."

अस्पताल के निदेशक ने बताया कि अरियल शेरॉन ने अपनी बाजू और टाँग भी हिलाई.

स्थिति पर रिपोर्ट

पिछले सप्ताह पड़े दौरे के बाद अरियल शेरॉन को दवाइयों के ज़रिए अचेतावस्था में रखा गया था ताकि उनके मस्तिष्क को कम से कम नुक़सान हो.

हदासाह अस्पताल के एक सर्जन ने कहा कि शेरॉन के जीवित रहने की संभावनाएँ काफ़ी प्रबल हैं.

लेकिन सर्जन ने कहा कि इसकी कम ही संभावनाएँ हैं कि वह प्रधानमंत्री के रूप में फिर से अपना सामान्य कामकाज कर पाएंगे.

कोमा से बाहर आने के बाद डॉक्टर अरियल शेरॉन के कई तरह के परीक्षण करेंगे.

शेरॉन के दिमाग़ के बारे में ये रिपोर्ट एटॉर्नी जनरल मेनी मज़ुज़ को दी जाएगी.

एहुद ओलमर्ट

अगर रिपोर्ट में पाया जाता है कि अरियल शेरॉन अब अपने कार्यालय लौटने और कामकाज करने के काबिल नहीं है तो कार्यवाहक नेता चुनने के लिए कैबिनेट की बैठक बुलाई जाएगी. ये नेता अगले चुनाव तक प्रधानमंत्री रहेगा.

अरियल शेरॉन की कदिमा पार्टी के पाँच कैबिनेट सदस्य ही उम्मीदवार बन सकते हैं. माना जा रहा है कि कार्यवाहक प्रधानमंत्री एहुद ओलमर्ट सबसे प्रमुख दावेदार हैं और बाकी चार सदस्य उनका समर्थन करेंगे.

कार्यवाहक प्रधानमंत्री के तौर पर एहुद ओलमर्ट का सबसे अहम फ़ैसला फ़लस्तीनी चुनावी अभियान के बारे में रहा.

इसराइल ने कहा है फ़लस्तीनी क्षेत्रों में 25 जनवरी को होने वाले चुनाव में फ़लस्तीनी उम्मीदवार पूर्वी यरुशलम में चुनाव अभियान चला सकते हैं लेकिन अभियान के लिए पहले से अनुरोध करना होगा.

पर साथ ही इसराइल ने कहा है कि हमास जैसे चरमपंथी गुट वहाँ अभियान नहीं चला सकते.

फ़लस्तीनी नेताओं ने ये शर्तें मानने से मना कर दिया है.