शुक्रवार, 06 जनवरी, 2006 को 12:30 GMT तक के समाचार
अब कुछ ऐसा नज़र आने लगा जैसे इसराइली प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन का ख़राब स्वास्थ्य उन्हें राजनीतिक जीवन में वापस लौटने की इजाज़त नहीं देगा.
ऐसा होने पर क्या हालात सामने आएँगे, उन्हीं का जायज़ा लिया है बीबीसी ऑनलाइन ने....
अगर अरियल शेरॉन राजनीति में वापस नहीं लौटते हैं तो क्या होगा?
इसराइली संविधान की दृष्टि से अगर प्रधानमंत्री कामकाज देखने में असमर्थ हैं तो उप प्रधानमंत्री 100 दिनों की अवधि तक कार्यवाहक प्रधानमंत्री का पदभार संभाल सकते हैं.
उसके बाद एक नया गठबंधन बनाए जाने की प्रक्रिया शुरू होती है जिसका आयोजन देश का राष्ट्रपति करता है.
और अगर प्रधानमंत्री की मृत्यु हो जाती है तो कैबिनेट उनकी जगह भरने के लिए किसी प्रत्याशी का चयन करता है.
हालाँकि, यह याद रखने की बात है कि इसराइल में 28 मार्च से नए चुनाव होने हैं, यानी सौ दिन की अवधि की समाप्ति से पहले ही.
तो अब इस बात की संभावना नज़र आ रही है कि अरियल शेरॉन के स्वास्थ्य को देखते हुए यह चुनाव कुछ अलग या असामान्य परिस्थितियों में ही होंगे.
जल्दी चुनाव पड़ाने की ज़रूरत शेरॉन की गठबंधन सरकार को समर्थन की कमी और उनके लिकुड पार्टी छोड़ कर नई कदीमा पार्टी के गठन की वजह से पड़ी है.
शेरॉन की कदीमा पार्टी का भविष्य क्या रहेगा?
यह कहा जा सकता है कि कदीमा शेरॉन है और शेरॉन कदीमा.
यह इसराइली राजनीति पर उनकी पकड़ की परिचायक है और इसके गठन का मक़सद यह था कि वह बिना किसी अवरोध के अपनी राजनीतिक आकांक्षाएँ या इरादे पूरी कर सकें..... ख़ासतौर पर फ़लस्तीनियों के साथ विवाद के मामले में.
और जब तक उन्हें अस्पताल पहुँचाने की नौबत नहीं आई लग रहा था कि उनकी यह रणनीति, जोकि बहुत से लोगों की नज़र में एक जुआ थी, रंग ला रही थी.
अब पार्टी- बिना किसी नेता के और राजनतीक कार्यक्रम या ढांचे के कितनी कामयाब हो पाएगी इसे लेकर संशय हैं.
और इसे देखते हुए उन राजनीतिज्ञों के भविष्य पर भी सवालिया निशान लग सकते हैं जो ऐतिहासिक महत्व के लेबर या लिकुड आंदोलनों को छोड़ कर कदीमा में शामिल हुए थे.
अब देखना यह है कि क्या ये नेता, शेरॉन के रहने या न रहने पर भी, उनकी विरासत का फ़ायदा उठा कर अपने लिए ताक़त जुटा पाएँगे या फिर पार्टी भंग भी हो सकती है.
ऐसे कौन से बड़े नेता हैं जो शेरॉन की जगह भर सकते हैं?
कदीमा के भीतर ही कई प्रतिभाशाली नेता हैं जिनमें से एक तो कार्यवाहक प्रधानमंत्री एहुद ओल्मर्ट हैं जो वित्त मंत्री भी हैं. फिर न्याय मंत्री ज़िपी लिवनी हैं और शायद सबसे ऐहम प्रत्याशी रक्षा मंत्री शाउल मोफ़ाज़ हो सकते हैं.
यह सब लिकुड पार्टी से आए वरिष्ठ नेता हैं जिन्होंने ग़ज़ा पट्टी और पश्चिमी तट से शेरॉन के सेना और बसे हुए यहूदियों को हटाए जाने के फ़ैसले का समर्थन किया था.
इस फ़ैसले को लेकर दक्षिणपंथियों ने तो कुछ विवाद पैदा किया था लेकिन इसराइली मतदाताओं को यह पसंद आया था.
शेरॉन के राजनीति से हटने का सबसे ज़्यादा फ़ायदा उनके कट्टर विरोधी बिन्यामिन नेतन्याहू को हो सकता है, जो लिकुड में बने रहे और आज उसका नेतृत्व कर रहे हैं.
लेकिन इस समय शेरॉन की जो स्थिति है उसको देखते हुए वह कोई बयान देने में सतर्कता बरत रहे हैं ताकि यह न लगे कि वह इस मामले का राजनीतिक फ़ायदा उठा रहे हैं.