मंगलवार, 03 जनवरी, 2006 को 10:43 GMT तक के समाचार
फ़लस्तीनी प्रशासन के चुनाव के लिए प्रचार अभियान मंगलवार को इन संदेहों के बीच शुरू हो गया है कि इस महीने के अंत में निर्धारित चुनाव हो भी सकेंगे या नहीं.
गज़ा पट्टी में हिंसा में आई तेज़ी के बीच सत्तारूढ़ फ़लस्तीनी पार्टी फ़तह पार्टी के नेताओं ने कहा है कि स्थिति इतनी अस्थिर है कि इसमें मतदान कराना मुश्किल होगा.
फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास चुनाव टालने की माँग को मानने से बच रहे थे लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि अगर इसराइल पूर्वी येरुशलम में फ़लस्तीनियों को मतदान की इजाज़त देने से इनकार करता है तो मतदान टाला जा सकता है.
उन्होंने कहा कि सभी गुट इस बात पर राज़ी हैं कि अगर इसराइल पूर्वी यरूशलम में फ़लस्तीनियों को मत नहीं डालने देता तो ऐसे में मतदान कराना मुश्किल होगा.
हालाँकि ग़ज़ा पट्टी में हमास के एक प्रवक्ता समी अबू ज़ुहरी ने कहा है कि मतदान आगे बढ़ाने के बारे में कोई समझौता नहीं हुआ है.
समी अबू ज़ुहरी ने कहा, "फ़लस्तीनी दल होने के नाते हमारी भूमिका चुनाव में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए है न कि बाधाओं को चुनाव स्थगित करने के लिए एक बहाना बनाने की."
इसराइली अधिकारियों ने हाल ही में कहा था कि वे पूर्वी येरुशलम में फ़लस्तीनियों को मतदान में भाग लेने से रोकने की अपनी धमकी पर पुनर्विचार कर रहे हैं.
लेकिन महमूद अब्बास ने अपने ही सत्तारुढ़ दल-फ़तह पार्टी के भीतर से उठ रही इन माँगों को ख़ारिज कर दिया है कि ग़ज़ा में अस्थिरता को देखते हुए मतदान टाल देना चाहिए.
ग़ौरतलब है कि क़रीब दस साल में पहली बार फ़लस्तीनी प्रशासन के सीधे चुनाव 25 जनवरी को होने हैं और कहा जा रहा है कि फ़तह पार्टी को चरमपंथी संगठन हमास से कड़ी चुनौती मिलेगी.
फ़लस्तीनी प्रशासन में पिछले दस साल से फ़तह पार्टी की ही सरकार रही है और मंगलवार को उसने अपने चुनाव अभियान की शुरूआत पूर्व फ़लस्तीनी नेता यासिर अराफ़ात की क़ब्र से की.
कुछ विपक्षी गुटों का कहना है कि फ़तह पार्टी के नेताओं को डर है कि चुनाव में उनका प्रदर्शन अच्छा नहीं रहेगा.