शनिवार, 31 दिसंबर, 2005 को 01:16 GMT तक के समाचार
इराक़ के तेल उद्योग पर बढ़ते संकट के मद्देनज़र उप प्रधानमंत्री अहमद चलाबी ने तेल मंत्रालय का प्रभार भी अपने हाथ में ले लिया है.
खाड़ी में ख़राब मौसम के कारण उत्पादन पर तो असर हो रही रहा है, देश के सबसे बड़े तेल रिफ़ाइनरी बैजी को टैंकर ड्राइवरों की हड़ताल के कारण बंद करना पड़ा है.
तेल की क़ीमतों में बढ़ोतरी करने के सरकार के फ़ैसले के बाद इस ड्राइवरों को जान से मारने की धमकी मिली थी, जिसके बाद ही वे काम पर नहीं आ रहे हैं.
इस संकट के मद्देनज़र इराक़ की अंतरिम सरकार ने तेल मंत्री इब्राहिम बहर अल उलूम को निलंबित कर दिया गया है. उलूम ने तेल क़ीमतों में बढ़ोतरी का विरोध किया था.
अब अहमद चलाबी अगले महीने यानी नई सरकार के सत्ता संभालने तक तेल मंत्रालय का कामकाज संभालेंगे. इराक़ में तेल संकट के कारण बिजली की आपूर्ति में कमी हो सकती है और इससे राजधानी बग़दाद और उत्तरी इराक़ पर असर पड़ सकता है.
आपत्ति
अपने पद से हटने के बाद बीबीसी से बातचीत में पूर्व तेल मंत्री इब्राहिम बहर उल उलूम ने कहा, "प्रधानमंत्री का फ़ैसला है कि मैं तीस दिन की छुट्टी पर जाऊं. ऐसा क्यों किया गया ये तो मैं नहीं जानता लेकिन शायद इसका इस बात से संबंध हो सकता है कि मैंने सरकार के तेल के दाम बढ़ाने के तरीक़े पर आपत्ति जताई थी."
सद्दाम हुसैन के शासन में तेल उत्पादन में मुख्य रुकावटें थीं अक्षम सरकारी नियंत्रण और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध. अब 2003 में अमरीकी हमले के बाद इराक़ के तेल उद्योग को वहाँ के विद्रोहियों के हमलों की वजह से काफ़ी नुक़सान उठाना पड़ रहा है.
हर हफ़्ते पाइपलाइनों और संयंत्रों पर कम से कम दो हमले होते हैं. अंतरराष्ट्रीय दाता देशों ने इराक़ के ऊर्जा क्षेत्र में पुनर्निर्माण का आश्वासन दिया था लेकिन अभी तक इसको लेकर कुछ ख़ास नहीं हुआ है.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ख़राब सुरक्षा व्यवस्था की वजह से इराक़ में निवेश भी नहीं हो रहा है. इराक़ अभी तक अपने तेल उत्पादन को इस स्तर पर नहीं ला पाया है जो कि अमरीकी हमले से पहले हुआ करता था.