बुधवार, 28 दिसंबर, 2005 को 00:41 GMT तक के समाचार
फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास ने चरमपंथी गुटों से अपील की है कि वे इसराइल पर रॉकेट से हमला करना बंद करें. अगले महीने होने वाले चुनाव से पहले ग़ज़ा में चरमपंथी नेताओं के साथ बैठक में उन्होंने ये अपील की.
बैठक के बाद मुख्य फ़लस्तीनी वार्ताकार साएब एराकात को ये कहते हुए बताया गया है कि उन्होंने संघर्ष विराम को 'राष्ट्रीय हित' में लिया गया फ़ैसला बताया.
लेकिन एक रिपोर्ट के अनुसार इस्लामिक जेहाद के नेताओं ने महमूद अब्बास की अपील को ठुकरा दिया है. इस बीच इसराइल ने ताज़ा रॉकेट हमले के बाद ग़ज़ा पट्टी में हवाई हमले किए हैं.
इसराइली सेना के अनुसार लेबनान की सीमा से सटे दो इसराइली शहरों पर रॉकेट से हमले किए गए. मंगलवार देर रात को हुए इस हमले में किसी के हताहत होने की अभी तक कोई ख़बर नहीं है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ इसराइल के सैनिक सूत्रों ने इस हमले के लिए लेबनान के चरमपंथी गुट हिज़बुल्ला को ज़िम्मेदार ठहराया है.
बीबीसी संवाददाता पीटर हिएट का कहना है कि महमूद अब्बास ये कोशिश कर रहे हैं कि चुनाव बिना किसी समस्या के निपट जाएँ. लेकिन उन्हें अपनी पार्टी के भीतर भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.
समस्याएँ
अगले महीने होने वाले चुनाव के मद्देनज़र महमूद अब्बास की समस्याएँ बढ़ती जा रही हैं. फ़लस्तीनी चरमपंथी इसराइली ठिकानों पर रॉकेट से हमला कर रहे हैं, हालाँकि इससे बहुत ज़्यादा नुक़सान नहीं हुआ है.
लेकिन हमलों से नाराज़ इसराइल ने धमकी दे डाली है कि अगर हमले होते रहें तो पूर्वी येरूशलम में
मतदान पर पाबंदी लगा दी जाएगी.
बाद में फ़लस्तीनी अधिकारियों ने कहा कि वे पूरा चुनाव ही रद्द कर सकते हैं. इसके बाद इसराइल ने अपनी धमकी वापस ले ली है.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अगर चुनाव हो भी जाते हैं तो महमूद अब्बास के लिए मुश्किलें कम नहीं होती दिख रही. उनकी फ़तह पार्टी में गुटबाज़ी तेज़ है.
इनमें से एक गुट यासिर अराफ़ात के सहयोगियों का है जो उनके साथ ट्यूनिस में थे, तो दूसरी ओर युवा नेता हैं तो फ़लस्तीनी क्षेत्र में ही डटे रहे.
पिछले हफ़्ते युवा नेताओं के गुट ने तो चुनाव के अपनी सूची देकर महमूद अब्बास को चकित ही कर दिया था. जनमत सर्वेक्षणों के मुताबिक अगर फ़तह में विभाजन हुआ, तो पार्टी की हार होगी.