अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आइएमएफ़) ने इराक़ के लिए 68 करोड़ 50 लाख डॉलर के एक नए कर्ज़ को मंज़ूरी दी है.
समझा जाता है कि आइएमएफ़ का ये फ़ैसला यह दर्शाता है कि वह इराक़ की युद्ध से छिन्न-भिन्न हुई अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए इराक़ सरकार के प्रयासों से संतुष्ट है.
संगठन ऐसे अन्य देशों को भी धन देने के लिए प्रोत्साहित करेगा जो इराक़ के पुनर्निर्माण में हाथ बँटाना चाहते हैं.
आइएमएफ़ के उप महाप्रबंधक ताकातोसी काटो ने कहा,"इराक़ी अधिकारियों ने वर्ष 2005 में सुरक्षा की अत्यंत कठिन स्थिति में भी आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में सफलता पाई है".
पिछले वर्ष आइएमएफ़ ने इराक़ को युद्ध समाप्ति के बाद आकस्मिक ऋण के तौर पर 43 करोड़ 60 लाख डॉलर दिए थे.
ये ऋण उन देशों के कर्ज़ों की अदायगी को ध्यान में रखकर दिए गए थे जिन्होंने सद्दाम हुसैन के शासनकाल में इराक़ को कर्ज़ दिया था.
सराहना
इराक़ को आइएमएफ़ से ऋण मिलने का निर्णय इस कारण महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि इससे इराक़ विदेशी निवेशकों से धन उधार ले सकेगा.
साथ ही इससे धनी देश इराक़ को कर्ज़ से राहत देने के कार्यक्रम को भी अमल में ला सकेंगे.
पेरिस क्लब के नाम से चर्चित 19 देशों का समूह आइएमएफ़ के फ़ैसले की प्रतीक्षा कर रहा था ताकि वह इराक़ की लगभग 39 अरब डॉलर की अदायगी में 80 प्रतिशत की छूट देने के प्रस्ताव को लागू कर सके.
अमरीका ने इराक़ को आइएमएफ़ के कर्ज़ की मंज़ूरी मिलने का स्वागत किया है. अमरीका ने पिछले वर्ष कहा था कि वह इराक़ को दिए गए लगभग चार अरब डॉलर के कर्ज़ को पूरी तरह माफ़ कर देगा.
बुश प्रशासन का कहना है कि इराक़ में लगभग हर दिन होनेवाले बम हमलों और इसके कारण आर्थिक गतिविधियों पर प्रतिकूल असर पड़ने के बावजूद इराक़ में प्रगति हो रही है.
अमरीका पर इराक़ की निर्भरता को कम करने की अमरीकी राष्ट्रपति बुश की रणनीति का एक महत्वपूर्ण पहलू ये रहा है कि इराक़ के पुनर्निर्माण के काम में अन्य देशों की भागीदारी अधिक से अधिक हो.
ऐसी स्थिति में अमरीका के लिए इराक़ से अपने सैनिकों को बाहर निकालना और आसान हो जाएगा.